कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अमेरिका में बॉन्ड यील्ड बढ़ने का असर भारतीय शेयर बाजार पर साफ दिखाई दिया। शुक्रवार, 11 सितंबर को सेंसेक्स और निफ्टी भारी गिरावट के साथ खुले।
पश्चिम एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव के बीच अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड 108 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है। तेल की कीमतों में इस तेजी ने महंगाई और ब्याज दरों को लेकर निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है। इसका असर भारतीय शेयर बाजार पर भी देखने को मिला।
सेंसेक्स 708 अंक और निफ्टी 234 अंक टूटा
शुक्रवार के शुरुआती कारोबार में बीएसई सेंसेक्स 708.56 अंक यानी करीब 0.95% गिरकर 74,194.03 पर आ गया। वहीं निफ्टी 50 में 234.10 अंक यानी करीब 1% की गिरावट दर्ज हुई और यह 23,243.70 के स्तर पर पहुंच गया।
रॉयटर्स के मुताबिक शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों जून के बाद के अपने निचले स्तरों पर पहुंच गए। बाजार में गिरावट काफी व्यापक रही और 16 प्रमुख सेक्टरों में से 15 में कमजोरी देखने को मिली।
क्रूड ऑयल 108 डॉलर के पार
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और ऊर्जा आपूर्ति को लेकर चिंता के कारण ब्रेंट क्रूड में तेज उछाल आया। शुक्रवार को ब्रेंट करीब 109.97 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जबकि अन्य बाजार आंकड़ों में यह 108 डॉलर से ऊपर बना रहा।
भारत अपनी कच्चे तेल की जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है। ऐसे में लंबे समय तक तेल महंगा रहने पर आयात बिल, महंगाई, रुपये और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है। हालांकि इसका असर सभी कंपनियों पर एक जैसा नहीं पड़ता।
अमेरिकी बॉन्ड यील्ड भी बनी चिंता
अमेरिकी 10-वर्षीय ट्रेजरी यील्ड करीब 4.96% तक पहुंच गई है और 5% के मनोवैज्ञानिक स्तर के करीब बनी हुई है। बढ़ती यील्ड के बीच बाजार में यह आशंका बढ़ी है कि महंगाई को नियंत्रित करने के लिए केंद्रीय बैंक ब्याज दरों को ज्यादा समय तक ऊंचा रख सकते हैं।
इस माहौल में विदेशी निवेशकों के लिए अमेरिकी बॉन्ड अपेक्षाकृत आकर्षक हो सकते हैं, जिससे उभरते बाजारों से पूंजी निकासी का दबाव बढ़ सकता है।
मेटल, ऑटो और बैंकिंग शेयरों में दबाव
शुक्रवार को बाजार में व्यापक बिकवाली देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में मेटल इंडेक्स करीब 2.8%, फाइनेंशियल शेयर करीब 1.4% और ऑटो सेक्टर करीब 1.3% नीचे रहा। स्मॉलकैप और मिडकैप शेयरों में भी सेंसेक्स-निफ्टी की तुलना में ज्यादा कमजोरी दिखी।
हालांकि तेल की कीमतों में तेजी से ONGC और Oil India जैसे अपस्ट्रीम तेल उत्पादकों के शेयरों में मजबूती देखने को मिली।
एशियाई बाजार भी दबाव में
भारतीय बाजार के साथ एशिया के दूसरे प्रमुख बाजारों में भी गिरावट रही। जापान का निक्केई करीब 2.8% और दक्षिण कोरिया का कोस्पी करीब 2.3% नीचे रहा। वैश्विक निवेशकों में बढ़ती महंगाई और ब्याज दरों की चिंता का असर दुनिया भर के शेयर बाजारों पर पड़ा।
निवेशकों के लिए क्यों बढ़ी चिंता?
- क्रूड ऑयल 108 डॉलर के पार
- मिडिल ईस्ट में सैन्य तनाव बढ़ा
- अमेरिकी 10-वर्षीय बॉन्ड यील्ड 5% के करीब
- महंगाई और ब्याज दरों को लेकर चिंता
- रुपये पर दबाव
- विदेशी निवेशकों की बिकवाली का जोखिम
निष्कर्ष: फिलहाल बाजार की दिशा वैश्विक घटनाक्रम, कच्चे तेल की कीमत और बॉन्ड यील्ड पर काफी निर्भर रहेगी। अगर मिडिल ईस्ट तनाव लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें ऊंची बनी रहती हैं, तो भारतीय बाजार में अस्थिरता आगे भी जारी रह सकती है।
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