वैश्विक बाजारों से मिले मजबूत संकेतों के बीच सप्ताह के आखिरी कारोबारी दिन यानी शुक्रवार को भारतीय शेयर बाजार की शुरुआत बढ़त के साथ हुई। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों हरे निशान में नजर आए। मेटल, रियल्टी और सीमेंट सेक्टर के शेयरों में खरीदारी देखने को मिली, जबकि आईटी शेयरों पर दबाव रहा।
सेंसेक्स 260 अंक चढ़कर खुला
बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) का 30 शेयरों वाला सेंसेक्स 260.65 अंक यानी 0.35 फीसदी की बढ़त के साथ 74,575.24 के स्तर पर खुला।
वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 64.10 अंक यानी 0.28 फीसदी की तेजी के साथ 23,334.70 के स्तर पर खुला।
शुरुआती कारोबार में बाजार के कई प्रमुख सेक्टरों में खरीदारी का रुख देखने को मिला।
मेटल और रियल्टी शेयरों में तेजी
सेक्टोरल इंडेक्स की बात करें तो शुरुआती कारोबार में निफ्टी मेटल इंडेक्स करीब 0.76 फीसदी की बढ़त के साथ सबसे आगे रहा। इसके बाद निफ्टी रियल्टी इंडेक्स में करीब 0.74 फीसदी की तेजी दर्ज की गई।
इसके अलावा सीमेंट और मीडिया सेक्टर के शेयरों में भी खरीदारी देखने को मिली। दूसरी ओर आईटी सेक्टर पर दबाव नजर आया।
IT शेयरों में गिरावट
शुरुआती कारोबार में निफ्टी आईटी इंडेक्स 1 फीसदी से ज्यादा नीचे कारोबार करता नजर आया। आईटी सेक्टर की प्रमुख कंपनियों के शेयरों में भी गिरावट देखने को मिली। टीसीएस, इंफोसिस, टेक महिंद्रा और एचसीएल टेक के शेयर शुरुआती कारोबार में दबाव में रहे।
इस तरह बाजार में जहां मेटल और रियल्टी शेयरों में खरीदारी का रुझान रहा, वहीं आईटी शेयरों में बिकवाली देखने को मिली।
ग्लोबल संकेतों का बाजार पर असर
भारतीय शेयर बाजार की शुरुआती तेजी को वैश्विक बाजारों के मजबूत संकेतों से जोड़कर देखा जा रहा है। अमेरिकी बाजारों में मजबूती और घरेलू स्तर पर आर्थिक गतिविधियों से जुड़े संकेतों के बीच निवेशकों की धारणा में सुधार देखने को मिला।
हालांकि, बाजार में आगे की दिशा वैश्विक संकेतों, विदेशी निवेशकों की गतिविधियों, घरेलू आर्थिक आंकड़ों और विभिन्न सेक्टरों के प्रदर्शन से प्रभावित हो सकती है।
निफ्टी के अहम स्तर
तकनीकी विश्लेषण के आधार पर बाजार में 23,000 से 23,150 के स्तर को महत्वपूर्ण सपोर्ट जोन के तौर पर देखा जा रहा है, जबकि 23,350 से 23,450 का स्तर निफ्टी के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
वहीं, बाजार में ओवरसोल्ड स्थिति की चर्चा भी है। हालांकि, किसी तकनीकी संकेतक के आधार पर बाजार में निश्चित तेजी या गिरावट की भविष्यवाणी नहीं की जा सकती।
प्राइमरी मार्केट में आईपीओ गतिविधियों के कारण भी निवेशकों का ध्यान बना हुआ है। ऐसे में अलग-अलग सेक्टर और कंपनियों में निवेश से पहले उनके वित्तीय प्रदर्शन, मूल्यांकन और जोखिमों का स्वतंत्र रूप से आकलन करना जरूरी है।
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