Thedigitalkhabari ब्यूरो: एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मचाते हुए समाजवादी पार्टी के मुखिया अखिलेश यादव पर निशाना साधा है। ओवैसी ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों का जिक्र करते हुए आरोप लगाया कि उस दौरान 50,000 लोग विस्थापित हुए थे और सपा सरकार पीड़ितों को न्याय दिलाने में विफल रही।
मुजफ्फरनगर दंगों की यादें और ओवैसी का आरोप
ओवैसी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि मुजफ्फरनगर की हिंसा को कभी भुलाया नहीं जा सकता। उन्होंने दावा किया कि उस समय की अखिलेश सरकार ने स्थिति को संभालने में लापरवाही बरती, जिसके कारण हजारों परिवारों को अपना घर-बार छोड़कर पलायन करना पड़ा। ओवैसी ने सवाल उठाया कि क्या समाजवादी पार्टी उन जख्मों को आज भी याद करती है या उन्हें वोट बैंक की राजनीति के लिए दबा दिया गया है।
मुजफ्फरनगर में 50,000 लोग विस्थापित हुए थे। उस समय की सरकार ने क्या किया? सपा और भाजपा एक ही सिक्के के दो पहलू हैं जो केवल मुसलमानों का इस्तेमाल करते हैं।
राजनीतिक गलियारों में बढ़ी सरगर्मी
ओवैसी के इस बयान ने उत्तर प्रदेश के राजनीतिक समीकरणों को फिर से गरमा दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि ओवैसी का यह हमला सीधे तौर पर मुस्लिम मतदाताओं को रिझाने की एक कोशिश है। सपा के गढ़ में जाकर इस तरह के तीखे सवाल पूछना यह दर्शाता है कि आगामी चुनावों में ओवैसी की पार्टी सपा के लिए बड़ी चुनौती पेश कर सकती है।
प्रमुख बिंदु:
- ओवैसी ने 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के दौरान 50,000 लोगों के विस्थापन का मुद्दा उठाया।
- अखिलेश यादव की पिछली सरकार पर पीड़ितों की अनदेखी का आरोप लगाया।
- मुस्लिम वोट बैंक को लेकर सपा और एआईएमआईएम के बीच तकरार तेज।
- भाजपा और सपा पर एक साथ निशाना साधते हुए ओवैसी ने खुद को विकल्प के रूप में पेश किया।
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