Thedigitalkhabari ब्यूरो: भारतीय सड़कों पर दोपहिया वाहन चलाना किसी एडवेंचर से कम नहीं है, लेकिन जब बात महिला राइडर्स की आती है, तो यह अनुभव अक्सर एक डरावने संघर्ष में बदल जाता है। हाल ही में सामने आए शिवानी जैसे कई मामले इस बात की गवाही देते हैं कि दोपहिया वाहन चलाने वाली महिलाओं को रोजाना किस तरह की मानसिक और शारीरिक चुनौतियों का सामना करना पड़ता है।
सड़क पर असुरक्षा का बढ़ता दायरा
सड़कों पर महिलाओं को अक्सर ‘टेलगेटिंग’ (पीछे से बहुत करीब आकर गाड़ी चलाना), रेस के लिए उकसाने और अभद्र इशारे करने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है। कई महिला राइडर्स का कहना है कि उन्हें केवल इसलिए निशाना बनाया जाता है क्योंकि वे एक पुरुष प्रधान क्षेत्र में अपनी जगह बनाने की कोशिश कर रही हैं।
सड़क पर सुरक्षा केवल एक नियम नहीं, बल्कि एक अधिकार है। जब कोई महिला बाइक पर होती है, तो उसे अक्सर अपनी गति कम करने या रास्ता छोड़ने के लिए मजबूर किया जाता है, जो पूरी तरह से अस्वीकार्य है।
प्रमुख चुनौतियां और अनुभव
- टेलगेटिंग: पीछे से तेज रफ्तार में आकर डराना एक आम समस्या है।
- रेसिंग के लिए उकसाना: अक्सर पुरुष राइडर्स महिलाओं को रेस के लिए उकसाते हैं ताकि उन्हें नीचा दिखाया जा सके।
- अभद्र व्यवहार: मिडिल फिंगर दिखाना या भद्दी टिप्पणियां करना सड़क पर आम बात हो गई है।
- मानसिक दबाव: हर समय पीछे मुड़कर देखना और सतर्क रहना राइडिंग के आनंद को खत्म कर देता है।
सुरक्षा के लिए क्या जरूरी है?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल सख्त कानून ही काफी नहीं हैं, बल्कि समाज की मानसिकता में बदलाव की भी आवश्यकता है। महिला राइडर्स का कहना है कि वे केवल अपनी मंजिल तक सुरक्षित पहुंचना चाहती हैं, लेकिन सड़कों पर मौजूद अराजक तत्व उनके आत्मविश्वास को तोड़ने की कोशिश करते हैं। प्रशासन को ऐसी घटनाओं पर सख्त कार्रवाई करनी चाहिए ताकि सार्वजनिक स्थानों पर महिलाओं की भागीदारी बिना किसी डर के बनी रहे।
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