Thedigitalkhabari ब्यूरो: चीन के बोहाई शिपयार्ड से सामने आई ताजा सैटेलाइट तस्वीरों ने रक्षा विशेषज्ञों की चिंता बढ़ा दी है। इन तस्वीरों में एक नई परमाणु-संचालित हमलावर पनडुब्बी (Type 095) का निर्माण होता दिख रहा है, जो चीन की नौसेना की बढ़ती ताकत का संकेत है। यह पनडुब्बी अपनी उन्नत तकनीक और चुपके से हमला करने की क्षमता के कारण हिंद-प्रशांत क्षेत्र के सुरक्षा समीकरणों को बदल सकती है।
उन्नत तकनीक और स्टेल्थ क्षमता
विशेषज्ञों के अनुसार, इस पनडुब्बी में ‘पंपजेट प्रोपल्शन’ सिस्टम और एक्स-शेप्ड स्टर्न का उपयोग किया गया है। यह डिजाइन न केवल पनडुब्बी की गतिशीलता को बढ़ाता है, बल्कि इसे पानी के भीतर लगभग अदृश्य बना देता है, जिससे दुश्मन के रडार और सोनार के लिए इसे ट्रैक करना बेहद मुश्किल हो जाता है।
चीन का यह कदम न केवल अपनी नौसेना को आधुनिक बनाने का प्रयास है, बल्कि यह हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी रणनीतिक पहुंच को और अधिक मजबूत करने की एक सोची-समझी चाल है।
क्षेत्रीय संतुलन और पाकिस्तान का विस्तार
चीन की यह बढ़ती ताकत पाकिस्तान के साथ मिलकर भारत के लिए दोहरी चुनौती पेश कर रही है। पाकिस्तान पहले ही आठ चीनी-डिज़ाइन वाली ‘हंगोर-क्लास’ एआईपी पनडुब्बियां हासिल करने की प्रक्रिया में है, जिससे उसकी कुल पनडुब्बी संख्या बढ़कर 11 हो जाएगी। यह भारत के लिए चिंता का विषय है क्योंकि चीन और पाकिस्तान का बढ़ता नौसैनिक सहयोग हिंद महासागर में भारत के दबदबे को चुनौती दे सकता है।
भारत की वर्तमान स्थिति और भविष्य की राह
वर्तमान में भारतीय नौसेना के पास 16 पारंपरिक और तीन रणनीतिक पनडुब्बियां हैं। हालांकि, भारत के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट जैसे P-75I और स्वदेशी परमाणु हमलावर पनडुब्बी कार्यक्रम प्रगति पर हैं, लेकिन इनकी डिलीवरी में अभी काफी समय लगने की संभावना है।
मुख्य बिंदु:
- चीन की Type 095 पनडुब्बी में उन्नत पंपजेट प्रोपल्शन का उपयोग।
- पाकिस्तान का अपने बेड़े में 8 नई चीनी पनडुब्बियों को शामिल करना।
- भारत के P-75I और प्रोजेक्ट-76 जैसे कार्यक्रमों में देरी।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ता समुद्री तनाव।
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