Thedigitalkhabari ब्यूरो: पंजाब के एक जिला उपभोक्ता आयोग ने शिक्षा क्षेत्र की कंपनी ‘एडुआइंक्स एजुकेशन सर्विसेज’ (Eduinx Education Services) को एक एमबीए स्नातक को 84,960 रुपये वापस करने का कड़ा निर्देश दिया है। यह फैसला तब आया जब कंपनी अपने ‘100% गारंटीड प्लेसमेंट’ के वादे को पूरा करने में पूरी तरह विफल रही।
क्या है पूरा मामला?
शिकायतकर्ता हरीश मल्होत्रा ने कंपनी पर आरोप लगाया था कि उन्होंने नौकरी दिलाने के बड़े-बड़े दावों के झांसे में आकर कोर्स में दाखिला लिया था। हालांकि, कोर्स पूरा होने के बाद भी कंपनी ने न तो कोई इंटरव्यू कराया और न ही रोजगार के अवसर प्रदान किए। मल्होत्रा ने अपनी मेहनत की कमाई वापस पाने के लिए उपभोक्ता अदालत का दरवाजा खटखटाया था।
उपभोक्ता आयोग की सख्त टिप्पणी
सुनवाई के दौरान आयोग ने पाया कि कंपनी द्वारा किया गया ‘100% प्लेसमेंट’ का दावा केवल ग्राहकों को लुभाने के लिए एक ‘अनुचित व्यापार व्यवहार’ (Unfair Trade Practice) था। आयोग ने अपने फैसले में स्पष्ट किया कि छात्रों को गुमराह करना और झूठे वादे करके फीस वसूलना उपभोक्ता संरक्षण कानून का उल्लंघन है।
उपभोक्ता आयोग ने कहा, ‘शिक्षा के नाम पर गारंटीड प्लेसमेंट का झांसा देना और फिर सेवा प्रदान करने में विफल रहना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार व्यवहार की श्रेणी में आता है।’
महत्वपूर्ण बिंदु
- कंपनी को 84,960 रुपये की पूरी राशि ब्याज सहित वापस करनी होगी।
- आयोग ने कंपनी के विज्ञापनों को भ्रामक और अनुचित करार दिया है।
- यह फैसला उन छात्रों के लिए एक बड़ी राहत है जो निजी शिक्षण संस्थानों के झूठे वादों का शिकार होते हैं।
इस फैसले ने एक बार फिर उन एड-टेक कंपनियों पर सवाल खड़े कर दिए हैं जो करियर बनाने के नाम पर युवाओं से मोटी रकम वसूलती हैं लेकिन परिणाम के समय गायब हो जाती हैं।
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