Thedigitalkhabari ब्यूरो: उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण ग्वालियर-झांसी रेल खंड पर सुरक्षा के लिहाज से एक बड़ा कदम उठाया गया है। भारतीय रेलवे ने इस व्यस्त रूट पर अत्याधुनिक ‘कवच’ प्रणाली को सफलतापूर्वक कमीशन कर दिया है। इस तकनीक के लागू होने से अब इस मार्ग पर ट्रेनों की सुरक्षा और परिचालन क्षमता में उल्लेखनीय सुधार होगा।
क्या है ‘कवच’ प्रणाली?
कवच एक स्वदेशी स्वचालित ट्रेन सुरक्षा (ATP) प्रणाली है, जिसे रिसर्च डिजाइन एंड स्टैंडर्ड्स ऑर्गनाइजेशन (RDSO) द्वारा विकसित किया गया है। यह प्रणाली लोको पायलट को सिग्नल जंप करने या गति सीमा का उल्लंघन करने से रोकने में सक्षम है। यदि लोको पायलट किसी आपात स्थिति में ब्रेक लगाने में विफल रहता है, तो कवच स्वतः ही ट्रेन की गति को नियंत्रित कर देता है या उसे पूरी तरह रोक देता है।
सुरक्षा के लिए क्यों है जरूरी?
रेलवे अधिकारियों के अनुसार, कवच प्रणाली का मुख्य उद्देश्य ‘जीरो एक्सीडेंट’ के लक्ष्य को प्राप्त करना है। यह प्रणाली न केवल मानवीय भूलों को कम करती है, बल्कि कोहरे जैसी खराब दृश्यता की स्थितियों में भी ट्रेनों के सुरक्षित संचालन को सुनिश्चित करती है।
प्रमुख विशेषताएं और लाभ
- स्वचालित ब्रेकिंग: खतरे के सिग्नल को पार करने की स्थिति में ट्रेन अपने आप रुक जाएगी।
- कोहरे में मददगार: खराब मौसम और कम दृश्यता के दौरान लोको पायलट को निरंतर अलर्ट मिलता रहेगा।
- आमने-सामने की टक्कर से बचाव: यदि एक ही ट्रैक पर दो ट्रेनें आ जाएं, तो यह प्रणाली उन्हें सुरक्षित दूरी पर रोक देगी।
- गति नियंत्रण: घुमावदार रास्तों और गति प्रतिबंध वाले क्षेत्रों में यह ट्रेन की गति को स्वतः नियंत्रित करेगी।
ग्वालियर-झांसी खंड पर इस प्रणाली का चालू होना यात्रियों के लिए एक बड़ी राहत है। रेलवे बोर्ड का लक्ष्य आने वाले समय में देश के सभी प्रमुख रेल मार्गों को इस सुरक्षा कवच से लैस करना है, ताकि रेल यात्रा को और अधिक सुरक्षित और भरोसेमंद बनाया जा सके।
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