Thedigitalkhabari ब्यूरो: केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 2029 तक देश के सभी एनडीए शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। इस घोषणा के बाद से ही राजनीतिक गलियारों में हलचल तेज हो गई है, विशेषकर बिहार में, जहां जनता दल यूनाइटेड (JDU) की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
बिहार में UCC की राह: चुनौतियां और समीकरण
बिहार में भाजपा और जदयू गठबंधन की सरकार है। मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अतीत में UCC पर एक संतुलित रुख अपनाया है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि किसी भी बड़े बदलाव से पहले व्यापक विमर्श और सभी समुदायों की सहमति अनिवार्य है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि अमित शाह का यह बयान जदयू के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है।
क्या जदयू बदलेगा अपना स्टैंड?
जदयू के वरिष्ठ नेताओं का कहना है कि पार्टी अपने धर्मनिरपेक्ष सिद्धांतों से समझौता नहीं करेगी। हालांकि, एनडीए के भीतर बढ़ते दबाव के बीच यह देखना दिलचस्प होगा कि नीतीश कुमार इस संवेदनशील मुद्दे पर क्या रुख अपनाते हैं।
समान नागरिक संहिता पर हमारा रुख स्पष्ट है। हम मानते हैं कि ऐसे किसी भी कानून को लागू करने से पहले समाज के सभी वर्गों के साथ विस्तृत चर्चा होनी चाहिए ताकि किसी भी समुदाय में असुरक्षा की भावना न पनपे। – जदयू प्रवक्ता
प्रमुख बिंदु:
- अमित शाह ने 2029 तक एनडीए राज्यों में UCC लागू करने का स्पष्ट संकेत दिया है।
- बिहार में नीतीश कुमार का रुख इस मुद्दे पर निर्णायक साबित होगा।
- विपक्ष ने इसे चुनावी एजेंडा करार देते हुए विरोध के स्वर तेज कर दिए हैं।
- एनडीए के भीतर समन्वय बनाने के लिए आने वाले समय में बैठकों का दौर शुरू हो सकता है।
आने वाले महीनों में यह मुद्दा न केवल बिहार की राजनीति, बल्कि पूरे देश के राजनीतिक विमर्श को प्रभावित करने वाला है। क्या नीतीश कुमार भाजपा के इस एजेंडे को स्वीकार करेंगे या फिर वे अपने पुराने स्टैंड पर कायम रहेंगे, यह आने वाला समय ही बताएगा।
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