Home बिजनेस भारत के गांवों पर एलन मस्क की नजर, दूरदराज इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने की तैयारी
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भारत के गांवों पर एलन मस्क की नजर, दूरदराज इलाकों तक इंटरनेट पहुंचाने की तैयारी

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नई दिल्ली: दुनिया के दिग्गज कारोबारी एलन मस्क एक बार फिर भारत के इंटरनेट बाजार को लेकर चर्चा में हैं। मस्क ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए कहा है कि उनकी सैटेलाइट इंटरनेट कंपनी स्टारलिंक उन लोगों के लिए सबसे ज्यादा मददगार साबित हो सकती है, जहां अभी तक बेहतर इंटरनेट कनेक्टिविटी नहीं पहुंच पाई है, खासकर ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में।

मस्क का यह बयान ऐसे समय पर सामने आया है, जब स्टारलिंक भारत में अपनी सेवाएं शुरू करने की दिशा में जरूरी मंजूरियों की प्रक्रिया में है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी ने अपने नए और एडवांस सैटेलाइट सिस्टम के साथ डायरेक्ट-टू-डिवाइस तकनीक के लिए भी आवेदन किया है।

11 हजार से ज्यादा गांवों तक नहीं पहुंचा 4G नेटवर्क

भारत में डिजिटल कनेक्टिविटी के क्षेत्र में लगातार काम हो रहा है, लेकिन ग्रामीण और दूरदराज के इलाकों में अब भी नेटवर्क की चुनौती बनी हुई है। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार देश के हजारों गांवों में अब भी 4G नेटवर्क की पहुंच नहीं है।

शहरी और ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट इस्तेमाल के बीच भी बड़ा अंतर देखने को मिलता है। सरकार की भारतनेट परियोजना के तहत बड़े पैमाने पर फाइबर नेटवर्क बिछाया गया है, लेकिन पहाड़ी, जंगली और दुर्गम इलाकों में कनेक्टिविटी अब भी एक बड़ी चुनौती है।

बिना मोबाइल टावर के मिलेगा इंटरनेट

स्टारलिंक की तकनीक की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें पारंपरिक मोबाइल टावर या फाइबर नेटवर्क पर पूरी तरह निर्भर नहीं रहना पड़ता। कंपनी लो-अर्थ ऑर्बिट यानी LEO सैटेलाइट्स के जरिए इंटरनेट सेवा उपलब्ध कराती है।

कंपनी की डायरेक्ट-टू-डिवाइस तकनीक का उद्देश्य मोबाइल फोन को सीधे सैटेलाइट नेटवर्क से जोड़ने की क्षमता विकसित करना है। यह तकनीक आपदा या ऐसे क्षेत्रों में उपयोगी हो सकती है, जहां सामान्य मोबाइल नेटवर्क उपलब्ध नहीं होता।

कीमत बन सकती है सबसे बड़ी चुनौती

हालांकि, भारत के ग्रामीण बाजार में स्टारलिंक के सामने कीमत एक बड़ी चुनौती हो सकती है। भारत में मोबाइल डेटा पहले से ही काफी सस्ता है। ऐसे में सैटेलाइट इंटरनेट सेवा के लिए जरूरी हार्डवेयर और मासिक शुल्क आम ग्रामीण परिवारों के बजट पर भारी पड़ सकते हैं।

मंजूरी का इंतजार

भारत में स्टारलिंक की सेवाओं की शुरुआत जरूरी सरकारी लाइसेंस, स्पेक्ट्रम और सुरक्षा से संबंधित मंजूरियों पर निर्भर करेगी। कंपनी की भारत में एंट्री को लेकर लंबे समय से चर्चा जारी है और अब ग्रामीण व दूरदराज के क्षेत्रों तक इंटरनेट पहुंचाने की संभावनाओं ने इस बहस को और तेज कर दिया है।

कुल मिलाकर, अगर स्टारलिंक को जरूरी मंजूरियां मिलती हैं, तो भारत के उन दुर्गम और ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट पहुंचाने का एक नया विकल्प सामने आ सकता है, जहां पारंपरिक नेटवर्क पहुंचाना अब भी चुनौती बना हुआ है।

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Shubhanshu Mishra - Founder and Editor in Chief of The Digital Khabari

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