Home बिजनेस देश में 28 करोड़ से ज्यादा कर्जदार! प्रति उधारकर्ता औसतन 4.77 लाख रुपये का कर्ज, क्या EMI बन रही नई आदत?
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देश में 28 करोड़ से ज्यादा कर्जदार! प्रति उधारकर्ता औसतन 4.77 लाख रुपये का कर्ज, क्या EMI बन रही नई आदत?

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नई दिल्ली: देश में कर्ज लेने वालों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। वित्त मंत्रालय की ओर से संसद में पेश आंकड़ों और RBI की रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च 2025 तक भारत में 28.3 करोड़ से अधिक यूनिक व्यक्तिगत उधारकर्ता थे। प्रति उधारकर्ता औसत बकाया कर्ज बढ़कर 4,77,583 रुपये तक पहुंच गया है।

हालांकि, यह आंकड़ा देश के हर नागरिक पर कर्ज नहीं दर्शाता, बल्कि सक्रिय व्यक्तिगत उधारकर्ताओं के औसत बकाया कर्ज को दर्शाता है। बढ़ते पर्सनल लोन, वाहन लोन, उपभोक्ता वस्तुओं के लिए कर्ज और डिजिटल क्रेडिट के कारण EMI आधारित खरीदारी का चलन तेजी से बढ़ा है।

2018 से 2025 तक दोगुने से ज्यादा हुए कर्जदार

आंकड़ों के अनुसार, मार्च 2018 में करीब 12.8 करोड़ उधारकर्ता थे। मार्च 2025 तक यह संख्या बढ़कर 28.3 करोड़ से अधिक हो गई।

इसी अवधि में प्रति उधारकर्ता औसत बकाया कर्ज लगभग 3.41 लाख रुपये से बढ़कर 4.77 लाख रुपये हो गया। इससे साफ है कि न केवल कर्ज लेने वालों की संख्या बढ़ी है, बल्कि औसतन उधारी का बोझ भी बढ़ा है।

RBI रिपोर्ट में बढ़ते घरेलू कर्ज का जिक्र

RBI की फाइनेंशियल स्टेबिलिटी रिपोर्ट के अनुसार, भारत में घरेलू क्षेत्र का कर्ज बढ़ रहा है। इसमें खासतौर पर नॉन-हाउसिंग रिटेल लोन की हिस्सेदारी तेजी से बढ़ी है।

पर्सनल लोन, वाहन ऋण, कंज्यूमर ड्यूरेबल्स, क्रेडिट कार्ड और अन्य उपभोग आधारित कर्ज अब लोगों की वित्तीय जरूरतों का बड़ा हिस्सा बनते जा रहे हैं।

घर से मोबाइल तक, हर जरूरत के लिए EMI

आज लोग सिर्फ घर और वाहन खरीदने के लिए ही नहीं, बल्कि मोबाइल, इलेक्ट्रॉनिक्स, शिक्षा, शादी, यात्रा और अन्य रोजमर्रा की जरूरतों के लिए भी कर्ज का सहारा ले रहे हैं।

डिजिटल लोन ऐप, तुरंत मंजूरी, आसान EMI और ‘अभी खरीदें, बाद में भुगतान करें’ जैसी सुविधाओं ने कर्ज लेना पहले से ज्यादा आसान बना दिया है।

सबसे ज्यादा बढ़ी पर्सनल लोन की मांग

होम लोन अब भी मूल्य के हिसाब से व्यक्तिगत ऋण का बड़ा हिस्सा है, लेकिन असुरक्षित पर्सनल लोन की मांग तेजी से बढ़ रही है।

गोल्ड लोन भी लोगों के बीच लोकप्रिय है, क्योंकि इसमें संपत्ति के रूप में रखे गए सोने के आधार पर अपेक्षाकृत जल्दी कर्ज मिल सकता है। वहीं कई लोग पुराने कर्ज और EMI को संभालने के लिए नया लोन लेकर कर्ज को एक जगह समेटने की कोशिश भी कर रहे हैं।

क्या EMI नई लाइफस्टाइल बन गई है?

बढ़ती महंगाई, घर और शिक्षा का खर्च, उपभोक्ता वस्तुओं की आसान किस्तें और डिजिटल क्रेडिट ने लोगों की खर्च करने की आदतों को बदल दिया है।

छोटी जरूरतों के लिए भी EMI लेने की प्रवृत्ति बढ़ी है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या आसान किस्तों की सुविधा लोगों के लिए आर्थिक मदद बन रही है या फिर धीरे-धीरे उन्हें कर्ज के लंबे चक्र में फंसा रही है?

भारत का घरेलू कर्ज दूसरे देशों की तुलना में

RBI के अनुसार, भारत का घरेलू कर्ज कुछ उभरती अर्थव्यवस्थाओं से अधिक है, जबकि चीन, मलेशिया और थाईलैंड जैसे कुछ देशों की तुलना में कम है।

बढ़ती उधारी के बीच विशेषज्ञों की चिंता इस बात को लेकर है कि लोगों को अपनी आय और भुगतान क्षमता को ध्यान में रखकर ही कर्ज लेना चाहिए, ताकि कई EMI का बोझ भविष्य में वित्तीय दबाव न बन जाए।

कुल मिलाकर, देश में कर्ज लेने वालों की बढ़ती संख्या यह संकेत देती है कि EMI अब सिर्फ घर और गाड़ी तक सीमित नहीं रही। मोबाइल से लेकर शादी और यात्रा तक, किस्तों पर खरीदारी भारतीयों की बदलती आर्थिक आदतों का अहम हिस्सा बनती जा रही है।

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Shubhanshu Mishra - Founder and Editor in Chief of The Digital Khabari

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