11 सितंबर 2026, शुक्रवार को भाद्रपद कृष्ण पक्ष की अमावस्या तिथि है। अमावस्या के दिन स्नान, दान, पितरों का स्मरण और धार्मिक अनुष्ठान करने की परंपरा है। पंचांग के अनुसार अमावस्या तिथि सुबह करीब 8:56 बजे तक रहेगी, इसके बाद शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा शुरू हो जाएगी।
11 सितंबर का पंचांग
- विक्रम संवत: 2083
- मास: भाद्रपद
- पक्ष: कृष्ण पक्ष
- तिथि: अमावस्या, सुबह करीब 8:56 बजे तक
- दिन: शुक्रवार
- नक्षत्र: पूर्वाफाल्गुनी, इसके बाद उत्तराफाल्गुनी
- योग: साध्य, इसके बाद शुभ
- करण: नाग के बाद किस्तुघ्न
- चंद्र राशि: सिंह, शाम करीब 7:08 बजे तक; इसके बाद कन्या
- सूर्य राशि: सिंह
- सूर्योदय: करीब 6:16 बजे
- सूर्यास्त: करीब 6:31 बजे
- चंद्रोदय: करीब 6:09 बजे
- चंद्रास्त: करीब 6:39 बजे
अमावस्या पर क्या करें?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अमावस्या का दिन आत्मचिंतन, स्नान-दान और पितरों के स्मरण के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इस दिन जरूरतमंदों को भोजन या अन्य उपयोगी वस्तुओं का दान करने तथा पूर्वजों के निमित्त प्रार्थना और तर्पण करने की परंपरा है।
अमावस्या तिथि के दौरान कई लोग बड़े शुभ कार्यों या नई शुरुआत के लिए उपयुक्त मुहूर्त का इंतजार करते हैं। हालांकि किसी नए कार्य के लिए शुभ समय का निर्धारण स्थान और व्यक्तिगत पंचांग के अनुसार किया जाना चाहिए।
आज का नक्षत्र
11 सितंबर को चंद्रमा दिन के शुरुआती हिस्से में सिंह राशि में रहेगा। पंचांग स्रोतों के अनुसार पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र दोपहर करीब 1:16 बजे तक रहेगा, इसके बाद उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र शुरू होगा। पूर्वाफाल्गुनी का संबंध पारंपरिक रूप से सुख, सौंदर्य और रचनात्मक गतिविधियों से जोड़ा जाता है।
राहुकाल में शुभ कार्य से बचें
शुक्रवार को राहुकाल सामान्यतः दिन के मध्य भाग में आता है। 11 सितंबर के लिए अलग-अलग स्थानों के पंचांग में समय में थोड़ा अंतर है। उदाहरण के लिए एक पंचांग स्रोत 10:51 बजे से 12:23 बजे तक राहुकाल बता रहा है। इसलिए किसी शुभ कार्य के लिए अपने शहर के स्थानीय पंचांग से समय की पुष्टि करना बेहतर रहेगा।
महत्वपूर्ण बात
पंचांग के समय स्थान के अनुसार कुछ मिनट आगे-पीछे हो सकते हैं। इसलिए पूजा, व्रत, तर्पण या किसी शुभ कार्य के लिए स्थानीय सूर्योदय और पंचांग को आधार बनाना उचित है।
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