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सूरज की रोशनी से रोशन हुई स्वास्थ्य सेवाएं, 7.2 किलोवाट सौर संयंत्र ने जनकपुर अस्पताल को दी बिजली की मजबूती

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डीएमएफ की 26.05 लाख रुपये की लागत से दूरस्थ वनांचल में स्वास्थ्य सुविधाओं को मिला नया संबल, वैक्सीन और जरूरी दवाइयों की सुरक्षा भी हुई आसान

दूरस्थ वनांचल क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर और सुचारू बनाने की दिशा में जिला प्रशासन की पहल अब धरातल पर असर दिखा रही है। जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) मद से सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जनकपुर, विकासखंड भरतपुर में स्थापित 7.2 किलोवाट क्षमता के सौर संयंत्र ने अस्पताल की विद्युत व्यवस्था को मजबूती दी है। वित्तीय वर्ष 2024-25 में स्वीकृत इस कार्य पर 26.05 लाख रुपये की लागत आई है। जिला मुख्यालय से लगभग 110 किलोमीटर दूर स्थित सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जनकपुर आसपास के दूरस्थ ग्रामीण एवं वनांचल क्षेत्रों के लोगों के लिए महत्वपूर्ण स्वास्थ्य केन्द्र है। यहां प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण उपचार के लिए पहुंचते हैं। अस्पताल में मरीजों के उपचार के साथ-साथ विभिन्न आवश्यक चिकित्सा उपकरणों, डीप फ्रीजर और अन्य व्यवस्थाओं के संचालन के लिए नियमित बिजली आपूर्ति जरूरी है।

बिजली बाधित होने से रहती थी परेशानी
सौर संयंत्र की स्थापना से पहले बिजली की अनियमितता के कारण स्वास्थ्य केन्द्र में कई बार चिकित्सकीय सेवाओं के संचालन में व्यवधान की स्थिति बनती थी। विद्युत आपूर्ति बाधित होने पर मरीजों के साथ अस्पताल के स्टॉफ को भी परेशानी का सामना करना पड़ता था। सबसे महत्वपूर्ण चुनौती टीकों एवं आवश्यक दवाइयों को सुरक्षित तापमान पर रखने की थी, जिसके लिए डीप फ्रीजर का लगातार संचालित रहना जरूरी है। अब सौर संयंत्र की स्थापना से अस्पताल में विद्युत उपलब्धता पहले की तुलना में अधिक सुचारु हुई है। इससे चिकित्सा सेवाओं को निरंतर संचालित करने में मदद मिल रही है और डीप फ्रीजर में रखे जाने वाले महत्वपूर्ण वैक्सीन एवं दवाइयों की सुरक्षा भी सुनिश्चित करने में सुविधा हो रही है।

निर्बाध बिजली से बढ़ा भरोसा

सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र जनकपुर में कार्यरत स्टाफ और उपचार के लिए पहुंचने वाले मरीजों ने सौर संयंत्र को दूरस्थ क्षेत्र के लिए उपयोगी पहल बताया है। उनका कहना है कि पहले बिजली बाधित होने की स्थिति में स्वास्थ्य सेवाओं के संचालन को लेकर चिंता बनी रहती थी, लेकिन अब सौर ऊर्जा संयंत्र से विद्युत व्यवस्था को मजबूती मिलने से उपचार, दवाइयों के संरक्षण और आवश्यक चिकित्सा व्यवस्था के संचालन में काफी सुविधा हुई है।

दूरस्थ अंचल में विकास की रोशनी

डीएमएफ मद से 26.05 लाख रुपये की लागत से स्थापित 7.2 किलोवाट क्षमता का यह सौर संयंत्र केवल बिजली का वैकल्पिक स्रोत नहीं, बल्कि दूरस्थ वनांचल में स्वास्थ्य सेवाओं की निरंतरता सुनिश्चित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। इससे अस्पताल की विद्युत जरूरतों को पूरा करने के साथ-साथ वैक्सीन एवं आवश्यक दवाइयों की सुरक्षा, चिकित्सा सेवाओं की निरंतरता और ग्रामीण मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है। दूरस्थ अंचल में सूरज की रोशनी से पैदा हो रही यह ऊर्जा अब स्वास्थ्य सेवाओं के लिए भरोसे की नई रोशनी बन रही है।

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Shubhanshu Mishra - Founder and Editor in Chief of The Digital Khabari

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