Home Breaking News रोबोटिक्स की नौकरी छोड़ किसान बने ऑनेस्ट राजा, 60,000 किमी की यात्रा कर बचाईं 300 लुप्तप्राय देसी बीज
Breaking Newsराष्ट्रीय

रोबोटिक्स की नौकरी छोड़ किसान बने ऑनेस्ट राजा, 60,000 किमी की यात्रा कर बचाईं 300 लुप्तप्राय देसी बीज

Share
रोबोटिक्स की नौकरी छोड़ किसान बने ऑनेस्ट राजा, 60,000 किमी की यात्रा कर बचाईं 300 लुप्तप्राय देसी बीज
Share

Thedigitalkhabari विशेष कवरेज: वर्ष 2022 में एक ऐसा मोड़ आया जब रोबोटिक्स की दुनिया की चकाचौंध को छोड़कर एक युवा ने मिट्टी की खुशबू को चुना। ऑनेस्ट राजा, जो कभी जटिल मशीनों और कोडिंग में अपना समय बिताते थे, आज अपने दो एकड़ के खेत में उन फसलों को उगा रहे हैं जो धीरे-धीरे हमारे समाज और थाली से गायब हो रही थीं। 60,000 किलोमीटर की लंबी और चुनौतीपूर्ण यात्रा के बाद, उन्होंने 300 से अधिक दुर्लभ और देसी बीजों का संग्रह तैयार किया है, जो न केवल एक किसान की मेहनत है, बल्कि भारत की कृषि विरासत को बचाने का एक साहसी प्रयास भी है।

प्रमुख आकर्षण और बिंदु (Highlights)

  • ऑनेस्ट राजा ने रोबोटिक्स इंजीनियर की अपनी आकर्षक नौकरी को त्यागकर खेती को अपना करियर बनाया।
  • भारत के विभिन्न राज्यों का 60,000 किलोमीटर का सफर तय कर 300 से अधिक देसी बीजों को एकत्रित किया।
  • दो एकड़ के खेत में इन बीजों का संरक्षण और संवर्धन किया जा रहा है।
  • उद्देश्य रासायनिक खेती से हटकर जैविक और पारंपरिक कृषि को बढ़ावा देना है।
  • यह पहल लुप्तप्राय फसलों को पुनर्जीवित करने और खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करने की दिशा में एक बड़ा कदम है।

पूरे घटनाक्रम की कहानी (Full Story)

ऑनेस्ट राजा का जीवन किसी प्रेरणादायक फिल्म से कम नहीं है। एक सफल रोबोटिक्स इंजीनियर के रूप में काम करते हुए, उन्हें एहसास हुआ कि तकनीक के विकास के बीच हम अपनी जड़ों और प्राकृतिक संसाधनों को खो रहे हैं। 2022 में उन्होंने एक बड़ा फैसला लिया—अपनी नौकरी से इस्तीफा दिया और भारत की उन गलियों और गांवों की ओर निकल पड़े जहां आज भी पुरानी परंपराएं जीवित हैं। उन्होंने अपनी बाइक और कार से पूरे भारत का चक्कर लगाया, जिसमें उन्होंने लगभग 60,000 किलोमीटर की दूरी तय की।

इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य उन किसानों से मिलना था जो अभी भी पारंपरिक बीजों को सहेज कर रखे हुए थे। कई स्थानों पर उन्हें ऐसे बीज मिले जो दशकों से किसी ने नहीं देखे थे। ऑनेस्ट राजा ने इन बीजों को न केवल इकट्ठा किया, बल्कि उनके पीछे की कहानियों और उगाने की विधियों को भी समझा। आज, उनके दो एकड़ के फार्म पर वे इन 300 किस्मों को उगा रहे हैं। यह काम आसान नहीं था; मिट्टी की उर्वरता को वापस लाना और बिना रसायनों के इन फसलों को बचाना एक बड़ी चुनौती थी। उन्होंने प्राकृतिक खेती के सिद्धांतों को अपनाकर इसे संभव बनाया है।

Share

Leave a comment

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Shubhanshu Mishra - Founder and Editor in Chief of The Digital Khabari

Explore more

-Sponsored-
advertising space available for your brand | The Digital Khabari
Related Articles
विकास के लाभों को भावी पीढ़ी तक पहुँचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: किरेन रिजिजू
Breaking Newsराष्ट्रीय

विकास के लाभों को भावी पीढ़ी तक पहुँचाना हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता: किरेन रिजिजू

Thedigitalkhabari संवाददाता: केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने हाल ही में एक उच्चस्तरीय...

जामिया मारपीट विवाद का असर: नूंह से दिल्ली में हमले की साजिश रचते 6 युवक अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार
Breaking NewsNCR

जामिया मारपीट विवाद का असर: नूंह से दिल्ली में हमले की साजिश रचते 6 युवक अवैध हथियारों के साथ गिरफ्तार

Thedigitalkhabari की विशेष रिपोर्ट: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के प्रतिष्ठित जामिया मिल्लिया इस्लामिया...