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संयुक्त राष्ट्र में नेतन्याहू का बड़ा बयान: 7 अक्टूबर का हमला 16 बार के 9/11 के बराबर

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संयुक्त राष्ट्र में नेतन्याहू का बड़ा बयान: 7 अक्टूबर का हमला 16 बार के 9/11 के बराबर
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Thedigitalkhabari ब्यूरो: इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने संयुक्त राष्ट्र महासभा के 79वें सत्र को संबोधित करते हुए 7 अक्टूबर के हमास हमले की तुलना अमेरिका पर हुए 9/11 आतंकी हमले से की। उन्होंने जोर देकर कहा कि इजरायल पर हुआ वह हमला भयावहता के पैमाने पर 16 बार के 9/11 हमलों के बराबर था, जिसने पूरे देश की सुरक्षा और अस्तित्व को झकझोर कर रख दिया है। नेतन्याहू ने स्पष्ट किया कि इजरायल तब तक चैन से नहीं बैठेगा जब तक कि हमास का पूरी तरह सफाया नहीं हो जाता और बंधकों की सुरक्षित वापसी सुनिश्चित नहीं हो जाती।

मुख्य बिंदु एवं हाइलाइट्स (Key Highlights)

  • प्रधानमंत्री नेतन्याहू ने 7 अक्टूबर के हमले को इजरायल के इतिहास का सबसे काला दिन बताया।
  • उन्होंने कहा कि हमास के हमले की तुलना 9/11 से करना इसलिए जरूरी है क्योंकि अनुपात के हिसाब से यह इजरायल के लिए कई गुना अधिक विनाशकारी था।
  • नेतन्याहू ने ईरान को क्षेत्रीय अस्थिरता का मुख्य सूत्रधार करार दिया और चेतावनी दी कि इजरायल अपनी रक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है।
  • संयुक्त राष्ट्र के मंच पर उन्होंने हमास के खात्मे तक युद्ध जारी रखने का संकल्प दोहराया।
  • गाजा में मानवीय स्थिति पर अंतरराष्ट्रीय दबाव के बावजूद इजरायल ने अपने सैन्य लक्ष्यों को प्राथमिकता दी है।

विस्तृत समाचार एवं पूरा घटनाक्रम (Detailed Report)

संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने संबोधन के दौरान बेंजामिन नेतन्याहू ने वैश्विक नेताओं के सामने इजरायल के दृष्टिकोण को मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि 7 अक्टूबर 2023 को हमास द्वारा की गई बर्बरता केवल एक आतंकी हमला नहीं था, बल्कि यह मानवता के खिलाफ एक युद्ध अपराध था। नेतन्याहू ने तर्क दिया कि यदि अमेरिका की जनसंख्या के अनुपात में 9/11 के हमले को देखा जाए, तो 7 अक्टूबर का हमला इजरायल के लिए उससे कहीं अधिक घातक और दर्दनाक था। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि इजरायल एक ऐसे दुश्मन से लड़ रहा है जो नागरिकों को ढाल के रूप में इस्तेमाल करता है और शांति की किसी भी संभावना को खारिज करता है।

नेतन्याहू ने अपने संबोधन में ईरान का विशेष रूप से उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि हमास, हिजबुल्लाह और हुती विद्रोही ईरान के इशारे पर काम कर रहे हैं और मध्य पूर्व में शांति को बाधित कर रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से आह्वान किया कि वे ईरान के परमाणु महत्वाकांक्षाओं और उसके द्वारा प्रायोजित आतंकवाद के खिलाफ एकजुट हों। नेतन्याहू ने कहा, ‘हम केवल हमास से नहीं लड़ रहे हैं, हम एक ऐसी विचारधारा से लड़ रहे हैं जो लोकतंत्र और स्वतंत्रता को नष्ट करना चाहती है। इजरायल का अस्तित्व इस क्षेत्र में शांति और स्थिरता के लिए अनिवार्य है।’

युद्ध के कारण गाजा में हो रही तबाही और मानवीय संकट पर पूछे गए सवालों के जवाब में नेतन्याहू ने कहा कि इजरायल नागरिकों की सुरक्षा के लिए हर संभव प्रयास कर रहा है, लेकिन हमास ने जानबूझकर गाजा की बुनियादी सुविधाओं को सैन्य अड्डों में बदल दिया है। उन्होंने कहा कि इजरायल की सेना ‘सटीक हमलों’ के जरिए केवल आतंकवादियों को निशाना बना रही है। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जब तक हमास के पास इजरायल के खिलाफ लड़ने की क्षमता है, तब तक युद्ध विराम की कोई भी बात इजरायल की सुरक्षा के साथ समझौता होगी।

इजरायल शांति चाहता है, लेकिन हम शांति के लिए अपनी सुरक्षा से समझौता नहीं करेंगे। 7 अक्टूबर का हमला हमारे लिए एक चेतावनी है कि हम अपने दुश्मनों को कभी भी कमतर न आंकें। हम तब तक नहीं रुकेंगे जब तक हम अपने लोगों को सुरक्षित घर वापस नहीं लाते और हमास की सैन्य शक्ति को पूरी तरह समाप्त नहीं कर देते।

भविष्य का असर एवं निष्कर्ष (Future Impact & Conclusion)

नेतन्याहू का यह भाषण अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एक तरफ जहां दुनिया के कई देश युद्धविराम की मांग कर रहे हैं, वहीं नेतन्याहू का यह रुख स्पष्ट करता है कि इजरायल अपने सैन्य लक्ष्यों को लेकर अडिग है। इस बयान के बाद मध्य पूर्व में तनाव और बढ़ने की आशंका है। भविष्य में, इजरायल की यह रणनीति न केवल हमास के साथ उसके संघर्ष को प्रभावित करेगी, बल्कि ईरान के साथ उसके तनावपूर्ण संबंधों को भी एक नए मोड़ पर ले जाएगी। अंतरराष्ट्रीय समुदाय के लिए अब सबसे बड़ी चुनौती यह है कि कैसे वे मानवीय सहायता और इजरायल की सुरक्षा चिंताओं के बीच संतुलन बना पाते हैं। निष्कर्षतः, नेतन्याहू का संबोधन यह संदेश देता है कि इजरायल के लिए यह युद्ध केवल एक सैन्य अभियान नहीं, बल्कि अपने अस्तित्व की रक्षा की लड़ाई है।

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Shubhanshu Mishra - Founder and Editor in Chief of The Digital Khabari

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