चांपा शहर के पूर्व नवभारत एजेंसी संचालक शुभांशु मिश्रा का दो टूक संदेश—फोन नहीं उठाने वालों की सूची अब तैयार
चांपा।
चांपा शहर में नवभारत प्रेस की एजेंसी पिंगाक्ष इंटरप्राइजेज के नाम से संचालित करने वाले शुभांशु मिश्रा ने पुराने विज्ञापन भुगतान को लेकर अब कड़ा रुख अपनाया है। एजेंसी संचालन के दौरान प्रकाशित कराए गए विज्ञापनों की कई देनदारियां अभी भी लंबित होने का दावा करते हुए मिश्रा ने संबंधित विज्ञापनदाताओं से अपना बकाया भुगतान तत्काल स्पष्ट करने और चुकाने की अपील की है।
मिश्रा का कहना है कि एजेंसी छोड़ने के बाद भी पुराने बकाये के लिए लगातार संपर्क किया जा रहा है, लेकिन कुछ लोगों द्वारा फोन तक रिसीव नहीं किया जा रहा है। विज्ञापन प्रकाशित करवाते समय संपर्क में रहने वाले लोग अब भुगतान के समय फोन से दूरी बना रहे हैं—यह स्थिति सवाल खड़े करती है।उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा है कि अब व्यक्तिगत रूप से बार-बार संपर्क करने के बजाय बकाया राशि से संबंधित उपलब्ध बिल, हिसाब-किताब और अन्य दस्तावेजों का मिलान कर सूची तैयार की जा रही है। यदि संबंधित पक्ष भुगतान नहीं करते अथवा अपने बकाये का हिसाब स्पष्ट नहीं करते हैं, तो उपलब्ध दस्तावेजों के आधार पर उनके नाम और संबंधित विज्ञापन भुगतान का विवरण सार्वजनिक करने का कदम उठाया जा सकता है।
मिश्रा ने कहा कि किसी की प्रतिष्ठा खराब करना उनका उद्देश्य नहीं है, लेकिन मेहनत और सेवा का पैसा मांगना भी गलत नहीं है। जिस समय विज्ञापन प्रकाशित कराने की जरूरत थी, उस समय एजेंसी पर भरोसा किया गया; अब भुगतान की जिम्मेदारी निभाना भी संबंधित पक्षों का दायित्व है।
उन्होंने यह भी कहा कि यदि किसी व्यक्ति या संस्था को सूची में अपना नाम या बकाया राशि गलत लगती है, तो वह संबंधित बिल, भुगतान रसीद या अन्य प्रमाण प्रस्तुत कर हिसाब स्पष्ट कर सकता है। लेकिन बिना भुगतान किए लगातार फोन से बचना समाधान नहीं है।
शुभांशु मिश्रा अब “The डिजिटल ख़बरी” नाम से न्यूज पोर्टल संचालित कर रहे हैं। उन्होंने संकेत दिया है कि पुराने विज्ञापन भुगतान के मामले में अब नरमी के बजाय दस्तावेजी हिसाब और सार्वजनिक जवाबदेही का रास्ता अपनाया जाएगा।
संदेश साफ है—हिसाब स्पष्ट कीजिए, बकाया चुकाइए और मामले को यहीं समाप्त कीजिए। अन्यथा दस्तावेजों के आधार पर सार्वजनिक रूप से हिसाब रखने की प्रक्रिया शुरू हो सकती है।
अब देखना यह होगा कि भुगतान के लिए लगातार किए जा रहे संपर्क के बाद संबंधित विज्ञापनदाता सामने आते हैं या फिर मामला दस्तावेजों के साथ सार्वजनिक किए जाने तक पहुंचता है।

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