वाणिज्य मंत्रालय द्वारा जारी आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, अगस्त 2026 में भारत का कुल व्यापार घाटा घटकर 9.41 अरब डॉलर रह गया है, जो पिछले साल इसी महीने में 11.62 अरब डॉलर था. यह सुधार आयात के मुकाबले निर्यात की रफ्तार तेज होने के कारण हुआ है. अगस्त के दौरान देश के कुल आयात बिल में बढ़ोतरी के बावजूद, निर्यात में आई इस तेज गति ने दोनों के बीच के अंतर (घाटे) को कम करने में बड़ी भूमिका निभाई.
कुल व्यापार की स्थिति (मर्चेंडाइज और सर्विसेज)
आंकड़ों के मुताबिक, अगस्त 2026 में भारत का कुल निर्यात (मर्चेंडाइज और सर्विसेज मिलाकर) 25.41 प्रतिशत बढ़कर 82.68 अरब डॉलर (लगभग 7.89 लाख करोड़ रुपये) पर पहुंच गया. पिछले साल अगस्त 2025 में यह आंकड़ा 65.93 अरब डॉलर था. वहीं, इस अवधि के दौरान कुल आयात भी पिछले साल के 77.55 अरब डॉलर से बढ़कर 92.09 अरब डॉलर हो गया.
मर्चेंडाइज (वस्तु) व्यापार का प्रदर्शन
समीक्षाधीन महीने में मर्चेंडाइज निर्यात में मजबूत वृद्धि देखी गई. डॉलर के संदर्भ में, मर्चेंडाइज निर्यात 26.12 प्रतिशत की छलांग लगाकर 43.81 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जो पिछले साल अगस्त में 34.74 अरब डॉलर था. भारतीय मुद्रा (रुपये) के लिहाज से मर्चेंडाइज निर्यात में 37.59 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह 3.04 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 4.18 लाख करोड़ रुपये हो गया. इस दौरान मर्चेंडाइज आयात धीमी गति से बढ़ते हुए 70.67 अरब डॉलर रहा, जिससे इस मोर्चे पर व्यापार घाटा 26.86 अरब डॉलर रहा.
सर्विस (सेवा) क्षेत्र ने दिया सहारा
भारत के सेवा क्षेत्र ने एक बार फिर शानदार प्रदर्शन कर व्यापार घाटे को पाटने में मदद की. अगस्त 2026 में सेवाओं का निर्यात 24.61 प्रतिशत की वृद्धि के साथ 38.87 अरब डॉलर होने का अनुमान है, जो पिछले साल 31.19 अरब डॉलर था. रुपये में यह निर्यात बढ़कर 3.71 लाख करोड़ रुपये हो गया. इसके मुकाबले सेवाओं का आयात केवल 21.42 अरब डॉलर रहा. इस तरह सर्विस सेक्टर ने 17.45 अरब डॉलर का बड़ा सरप्लस (मुनाफा) कमाया, जिसने मर्चेंडाइज घाटे के असर को काफी हद तक कम कर दिया.
कुल मिलाकर, रुपये के संदर्भ में भारत का कुल निर्यात अगस्त 2026 में सालाना आधार पर 36.81 प्रतिशत बढ़कर 7.89 लाख करोड़ रुपये रहने का अनुमान है.
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