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वंदे मातरम गाने के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट

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वंदे मातरम गाने के लिए किसी को मजबूर नहीं किया जा सकता: सुप्रीम कोर्ट
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Thedigitalkhabari ब्यूरो: सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए स्पष्ट किया है कि अदालतें यह तय नहीं कर सकतीं कि देश का ‘राष्ट्रीय गीत’ क्या होना चाहिए। शीर्ष अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि किसी भी नागरिक को ‘वंदे मातरम’ गाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और न ही ऐसा न करने पर उन्हें दंडित किया जाना चाहिए।

अदालत का रुख: संवैधानिक स्वतंत्रता सर्वोपरि

न्यायमूर्ति संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति एमएम सुंदरेश की पीठ ने एक याचिका पर सुनवाई करते हुए यह टिप्पणी की। अदालत ने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 19(1)(ए) नागरिकों को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है, जिसमें चुप रहने का अधिकार भी शामिल है। पीठ ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रवाद की भावना को जबरन थोपा नहीं जा सकता।

अदालत ने कहा, ‘हम किसी को वंदे मातरम गाने के लिए मजबूर नहीं कर सकते। यदि कोई व्यक्ति इसे गाने से इनकार करता है, तो उसे इसके लिए दंडित नहीं किया जा सकता। कानून किसी को भी अपनी पसंद के गीत गाने या न गाने के लिए बाध्य नहीं करता है।’

मामले की पृष्ठभूमि

यह मामला लंबे समय से अदालती बहस का हिस्सा रहा है। याचिकाकर्ता ने मांग की थी कि देश के सभी शिक्षण संस्थानों और कार्यालयों में ‘वंदे मातरम’ गाना अनिवार्य कर दिया जाए। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस मांग को खारिज करते हुए कहा कि देशभक्ति और सम्मान का भाव मन से आता है, न कि सरकारी आदेशों या अदालती निर्देशों से।

मुख्य बिंदु:

  • अदालत ने कहा कि राष्ट्रगान और राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान अनिवार्य है, लेकिन गाने की बाध्यता नहीं है।
  • संविधान के तहत किसी भी व्यक्ति को अपनी अंतरात्मा के खिलाफ जाने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
  • न्यायपालिका का काम कानून की व्याख्या करना है, न कि नागरिकों के लिए देशभक्ति के मानक तय करना।

कानूनी विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट का यह फैसला व्यक्तिगत स्वतंत्रता और संवैधानिक मूल्यों को मजबूती प्रदान करता है। यह स्पष्ट करता है कि भारत जैसे विविधतापूर्ण देश में राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति के कई तरीके हो सकते हैं और किसी एक तरीके को थोपना लोकतांत्रिक मूल्यों के खिलाफ है।

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Shubhanshu Mishra - Founder and Editor in Chief of The Digital Khabari

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