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महिलाओं में लिवर की बीमारी के लक्षण क्यों हो जाते हैं नजरअंदाज? जानें क्या है वजह

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लिवर की बीमारी को अक्सर शराब, हेपेटाइटिस या मोटापे से जोड़कर देखा जाता है। लेकिन महिलाओं में इसके लक्षण कई बार अलग तरीके से सामने आते हैं। थकान, खुजली, पेट फूलना और जी मिचलाना जैसे संकेतों को अक्सर तनाव, हार्मोनल बदलाव या सामान्य कमजोरी समझकर नजरअंदाज कर दिया जाता है। ऐसे में बीमारी की पहचान देर से हो सकती है।

लिवर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है, जो मेटाबॉलिज्म, पाचन और शरीर से विषैले पदार्थों को बाहर निकालने जैसे कई जरूरी काम करता है। महिलाओं में हार्मोनल बदलाव, गर्भावस्था, PCOS और मेनोपॉज जैसी स्थितियां भी लिवर की सेहत को प्रभावित कर सकती हैं।

महिलाओं में लिवर की बीमारी का पता देर से क्यों चलता है?

लिवर की बीमारी शुरुआती चरण में कई बार बहुत हल्के लक्षणों के साथ सामने आती है। लगातार थकान, पेट फूलना, जी मिचलाना या मूड में बदलाव जैसे लक्षणों को महिलाएं अक्सर तनाव, हार्मोनल बदलाव या पाचन संबंधी समस्या समझ लेती हैं।

इसके अलावा, सामान्य लिवर फंक्शन टेस्ट हमेशा शुरुआती स्तर की बीमारी को पकड़ने में सक्षम नहीं होते। इसी वजह से कई मामलों में बीमारी का पता तब चलता है, जब लिवर पर ज्यादा असर पड़ चुका होता है।

यह धारणा भी गलत है कि लिवर की बीमारी मुख्य रूप से पुरुषों की समस्या है। महिलाओं में भी शराब, कुछ दवाओं और मेटाबॉलिक समस्याओं के कारण लिवर प्रभावित हो सकता है।

प्रेग्नेंसी और हार्मोनल बदलाव का लिवर पर असर

गर्भावस्था के दौरान शरीर में कई तरह के हार्मोनल और मेटाबॉलिक बदलाव होते हैं। एस्ट्रोजन और प्रोजेस्टेरोन जैसे हार्मोन के स्तर में बदलाव से बाइल फ्लो प्रभावित हो सकता है और कुछ महिलाओं में गर्भावस्था से जुड़ी लिवर की समस्याएं हो सकती हैं।

कुछ दुर्लभ लेकिन गंभीर स्थितियों में इंट्राहेपेटिक कोलेस्टेसिस ऑफ प्रेग्नेंसी (ICP), एक्यूट फैटी लिवर ऑफ प्रेग्नेंसी (AFLP) और HELLP सिंड्रोम शामिल हैं। इसलिए गर्भावस्था के दौरान असामान्य लक्षणों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

PCOS से भी बढ़ सकता है फैटी लिवर का खतरा

पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम यानी PCOS को आमतौर पर पीरियड्स और फर्टिलिटी से जुड़ी समस्या माना जाता है, लेकिन इसका संबंध मेटाबॉलिक हेल्थ से भी है।

PCOS में इंसुलिन रेजिस्टेंस और हार्मोनल असंतुलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इन स्थितियों के कारण लिवर में फैट जमा होने का खतरा बढ़ सकता है। इसलिए PCOS वाली महिलाओं को अपनी मेटाबॉलिक और लिवर हेल्थ पर भी ध्यान देना जरूरी है।

मेनोपॉज के बाद क्यों बढ़ सकता है फैटी लिवर का खतरा?

मेनोपॉज के दौरान शरीर में एस्ट्रोजन का स्तर कम हो जाता है। एस्ट्रोजन शरीर में फैट मेटाबॉलिज्म और इंसुलिन सेंसिटिविटी समेत कई प्रक्रियाओं को प्रभावित करता है।

मेनोपॉज के बाद शरीर में फैट के वितरण, कोलेस्ट्रॉल और इंसुलिन रेजिस्टेंस में बदलाव हो सकते हैं। इन कारणों से कुछ महिलाओं में फैटी लिवर और लिवर फाइब्रोसिस का जोखिम बढ़ सकता है।

महिलाओं में लिवर की बीमारी के कौन से लक्षण दिख सकते हैं?

लिवर की बीमारी के लक्षण हर व्यक्ति में अलग हो सकते हैं। महिलाओं में अक्सर इन संकेतों को दूसरी समस्याओं से जोड़ दिया जाता है:

  • लगातार थकान: सामान्य कमजोरी या तनाव समझकर इसे नजरअंदाज किया जा सकता है।
  • खुजली: कुछ लिवर संबंधी बीमारियों में खुजली शुरुआती संकेतों में शामिल हो सकती है।
  • पेट फूलना: ब्लोटिंग या पेट से जुड़ी परेशानी को सामान्य पाचन समस्या माना जा सकता है।
  • जी मिचलाना: लगातार मतली या अस्वस्थ महसूस होना भी एक संकेत हो सकता है।
  • पीलिया: त्वचा या आंखों में पीलापन लिवर की समस्या का संकेत हो सकता है।
  • ऑटोइम्यून लिवर डिजीज: महिलाओं में ऑटोइम्यून हेपेटाइटिस और प्राइमरी बाइलरी कोलांगाइटिस (PBC) जैसी बीमारियां अधिक देखी जाती हैं।

कब डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए?

अगर लगातार थकान, त्वचा में खुजली, आंखों या त्वचा में पीलापन, पेट में लगातार परेशानी या अन्य असामान्य लक्षण बने हुए हैं, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है।

PCOS, डायबिटीज, मोटापा या पहले से लिवर संबंधी समस्या जैसी स्थितियों में डॉक्टर जरूरत के अनुसार ब्लड टेस्ट, अल्ट्रासाउंड या फाइब्रोस्कैन जैसी जांच की सलाह दे सकते हैं।

लिवर को स्वस्थ रखने के लिए क्या करें?

लिवर की सेहत बनाए रखने के लिए संतुलित खान-पान, नियमित शारीरिक गतिविधि, पर्याप्त नींद और डॉक्टर की सलाह के अनुसार दवाओं का इस्तेमाल महत्वपूर्ण है।

साथ ही, किसी भी लगातार बने रहने वाले लक्षण को केवल तनाव या हार्मोनल बदलाव मानकर लंबे समय तक नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

जरूरी बात

महिलाओं में लिवर की बीमारी के लक्षण हमेशा स्पष्ट नहीं होते। समय पर पहचान, सही जांच और डॉक्टर से सलाह बीमारी को गंभीर होने से रोकने में मदद कर सकती है।

डिस्क्लेमर: यह जानकारी केवल शैक्षिक उद्देश्य से दी गई है। किसी भी लक्षण या स्वास्थ्य संबंधी चिंता के लिए योग्य डॉक्टर से परामर्श लें। खुद से कोई दवा या इलाज शुरू न करें।

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Shubhanshu Mishra - Founder and Editor in Chief of The Digital Khabari

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