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4 साल में दुनिया में 8.35% बढ़े ओरल कैंसर के मरीज, दक्षिण एशिया में 14.33% का उछाल; भारत के लिए भी चिंता

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The Lancet Public Health की नई रिपोर्ट में ओरल हेल्थ को लेकर चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 2019 से 2023 के बीच दुनियाभर में होंठ और मुंह के कैंसर के नए मामलों में 8.35% की बढ़ोतरी हुई है। वहीं दक्षिण एशिया, जिसमें भारत भी शामिल है, वहां मुंह के कैंसर के मामलों में करीब 14.33% का उछाल दर्ज किया गया है।

मुंह और दांतों से जुड़ी बीमारियां दुनियाभर में तेजी से बढ़ती स्वास्थ्य समस्याओं में शामिल हैं। हाल ही में प्रकाशित The Lancet Public Health की रिपोर्ट में 2019 से 2023 के बीच वैश्विक स्तर पर ओरल हेल्थ की स्थिति का आकलन किया गया है।

रिपोर्ट के मुताबिक इस अवधि में दुनिया में मुंह की प्रमुख बीमारियों से प्रभावित लोगों की कुल संख्या करीब 3.62 अरब से बढ़कर 3.73 अरब हो गई। यानी कुल मामलों में लगभग 3.07% की वृद्धि हुई है।

4 साल में 8.35% बढ़े ओरल कैंसर के नए मामले

रिपोर्ट का सबसे चिंताजनक पहलू होंठ और मुंह के कैंसर से जुड़ा है। 2019 से 2023 के बीच दुनियाभर में इसके नए मामलों में 8.35% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

दक्षिण एशिया में भी स्थिति चिंता बढ़ाने वाली है। भारत समेत इस क्षेत्र में होंठ और मुंह के कैंसर के नए मामलों में करीब 14.33% की वृद्धि सामने आई है।

वहीं सब-सहारा अफ्रीका में भी मुंह के कैंसर के नए मामलों में लगभग 14.86% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।

दक्षिण एशिया में कुछ ओरल बीमारियों में सुधार

रिपोर्ट में हर आंकड़ा चिंता बढ़ाने वाला नहीं है। दक्षिण एशिया में मुंह की प्रमुख बीमारियों के कुल मामलों में करीब 3.34% की कमी दर्ज की गई है।

बच्चों के दूध के दांतों में सड़न के मामलों में भी दक्षिण एशिया में सुधार देखने को मिला है। इस क्षेत्र में ऐसे मामलों में लगभग 11.67% की कमी दर्ज की गई।

हालांकि दूसरी ओर, स्थायी दांतों में बिना इलाज वाली सड़न के मामलों में दक्षिण एशिया में करीब 2.65% की बढ़ोतरी हुई है।

दुनियाभर में ओरल हेल्थ के मरीज बढ़े

2019 में दुनिया में मुंह की प्रमुख बीमारियों से प्रभावित लोगों की संख्या करीब 3.62 अरब थी, जो 2023 में बढ़कर 3.73 अरब हो गई।

इन बीमारियों में दांतों की सड़न, मसूड़ों की बीमारी, दांतों का गिरना और मुंह से जुड़ी अन्य समस्याएं शामिल हैं।

उम्र के प्रभाव को हटाकर देखा जाए तो बीमारी की दर में बहुत बड़ा बदलाव नहीं आया, लेकिन बढ़ती आबादी के कारण मरीजों की कुल संख्या लगातार बढ़ रही है।

बच्चों में दूध के दांतों की सड़न में आई कमी

दुनियाभर में बच्चों के दूध के दांतों में सड़न के मामलों में 2019 से 2023 के बीच करीब 4.56% की कमी आई।

इन मामलों की संख्या लगभग 53.3 करोड़ से घटकर 50.9 करोड़ रह गई। दक्षिण एशिया समेत कई क्षेत्रों में बच्चों के दांतों की सड़न के मामलों में कमी देखने को मिली।

हालांकि उच्च आय वाले देशों में बच्चों के दूध के दांतों की सड़न के मामलों में लगभग 4.79% की बढ़ोतरी हुई।

स्थायी दांतों की सड़न और मसूड़ों की बीमारी बढ़ी

रिपोर्ट के अनुसार बिना इलाज वाली स्थायी दांतों की सड़न के मामलों में दुनिया भर में करीब 2.78% की वृद्धि हुई। ऐसे मामलों की संख्या 2.20 अरब से बढ़कर 2.26 अरब हो गई।

वहीं गंभीर पायरिया के मामले भी बढ़े हैं। 2019 में दुनियाभर में इसके करीब 103 करोड़ मामले थे, जो 2023 में बढ़कर लगभग 109 करोड़ हो गए।

दांत गिरने के मामलों में भी बढ़ोतरी हुई। 2019 में ऐसे करीब 33.6 करोड़ मामले थे, जबकि 2023 में इनकी संख्या बढ़कर 37.3 करोड़ पहुंच गई।

अमीर देशों में भी ओरल हेल्थ बड़ी चुनौती

रिपोर्ट में यह भी सामने आया कि अलग-अलग आय वाले देशों में ओरल हेल्थ की स्थिति अलग है। उच्च आय वाले देशों में बच्चों के दांतों की सड़न और मुंह से जुड़ी कुछ अन्य समस्याओं का बोझ अभी भी काफी अधिक है।

वहीं कम और मध्यम आय वाले कई क्षेत्रों में इलाज और ओरल हेल्थ सेवाओं तक पहुंच की कमी बड़ी चुनौती बनी हुई है।

WHO का 2030 तक 10% कमी का लक्ष्य

विश्व स्वास्थ्य संगठन ने साल 2030 तक दुनियाभर में मुंह और दांतों से जुड़ी बीमारियों को कम करने के लिए Global Oral Health Action Plan (GOHAP) तैयार किया है।

इसका उद्देश्य ओरल हेल्थ की रोकथाम, इलाज और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच को बेहतर बनाना है। लेकिन मौजूदा आंकड़े बताते हैं कि इस लक्ष्य को हासिल करने के लिए अभी काफी प्रयास की जरूरत है।

भारत समेत दक्षिण एशिया के लिए क्या है संदेश?

रिपोर्ट से साफ है कि दक्षिण एशिया में कुछ ओरल बीमारियों के मामलों में सुधार हुआ है, लेकिन ओरल कैंसर और स्थायी दांतों की सड़न जैसी समस्याएं अभी भी बड़ी चुनौती हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार नियमित डेंटल चेकअप, मुंह की स्वच्छता, तंबाकू और अन्य हानिकारक पदार्थों से दूरी तथा मुंह में लंबे समय से बने किसी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करना जरूरी है।

ओरल हेल्थ को केवल दांतों तक सीमित समस्या मानना सही नहीं है। मुंह की कई बीमारियां लंबे समय में गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकती हैं। ऐसे में समय पर जांच और सही इलाज बेहद जरूरी है।

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Shubhanshu Mishra - Founder and Editor in Chief of The Digital Khabari

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