जांजगीर-चांपा जिले के बम्हनीडीह में कथावाचक अनिरुद्धाचार्य महाराज की नौ दिवसीय कथा का शुभारंभ हुआ है। कथा के दौरान उन्होंने आरक्षण व्यवस्था को लेकर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि आरक्षण का लाभ उन्हीं लोगों को मिलना चाहिए, जिन्हें वास्तव में इसकी जरूरत है। आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को जाति से परे आरक्षण देने की उन्होंने वकालत की। साथ ही यूजीसी कानून और जाति के नाम पर समाज को बांटने की राजनीति पर भी सवाल उठाए।

अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि आर्थिक रूप से कमजोर व्यक्ति चाहे किसी भी जाति का हो, उसे आरक्षण का लाभ मिलना चाहिए। उन्होंने जाति और वर्ण व्यवस्था को लेकर भी अपनी बात रखते हुए कहा कि समाज को जाति के नाम पर बांटने से आपसी संघर्ष बढ़ता है।
उन्होंने यूजीसी कानून को लेकर भी सवाल उठाए और दावा किया कि इस तरह के कानून से समाज में जातिगत तनाव और हिंसा बढ़ने की आशंका है।
सनातन धर्म को लेकर अनिरुद्धाचार्य महाराज ने कहा कि सनातन समाज को बांटने के बजाय एक सूत्र में जोड़ने का संदेश देता है। उन्होंने धार्मिक कथाओं और सत्संग को मानव जीवन में सकारात्मक बदलाव का माध्यम बताया।
वहीं, फिल्मों में साधु-संतों और सनातन परंपराओं के चित्रण को लेकर भी उन्होंने नाराजगी जताई। उन्होंने धार्मिक और ऐतिहासिक चरित्रों पर आधारित फिल्मों के निर्माण की जरूरत बताई, ताकि नई पीढ़ी भारतीय संस्कृति और ऋषि-मुनियों के योगदान से परिचित हो सके।
बम्हनीडीह में शुरू हुई नौ दिवसीय कथा के दौरान अनिरुद्धाचार्य महाराज के बयानों के बाद आरक्षण, जातिगत व्यवस्था और सनातन परंपराओं के चित्रण जैसे मुद्दे एक बार फिर चर्चा में हैं।
बाइट : अनिरुद्धाचार्य महाराज
“आरक्षण उसको मिले जिसे उसकी जरूरत है, जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं, चाहे वो किसी भी जाति का हो।”
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