मुंबई: मध्य पूर्व में गहराते भू-राजनीतिक तनाव और कच्चे तेल की आसमान छूती कीमतों के बीच भारतीय शेयर बाजार में आज, यानी गुरुवार 10 सितंबर 2026 को बेहद सुस्ती और सावधानी भरा माहौल देखा जा रहा है. वैश्विक बाजारों से मिले कमजोर संकेतों के कारण घरेलू संस्थागत निवेशकों ने ‘वेट एंड वॉच’ की नीति अपनाई है. शुरुआती कारोबार में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज का प्रमुख सूचकांक सेंसेक्स मात्र 21.32 अंक (0.03%) की मामूली गिरावट के साथ 74,742.91 के स्तर पर कारोबार करता दिखा. वहीं, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी भी 7.85 अंक (0.03%) टूटकर 23,423.65 के स्तर पर लगभग सपाट बना रहा.
बाजार टूटने के मुख्य कारण
बाजार विश्लेषकों के अनुसार, अंतरराष्ट्रीय बाजार में ब्रेंट क्रूड का 101 डॉलर प्रति बैरल के पार निकलना भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका है. भारत अपनी जरूरत का 80% से अधिक तेल आयात करता है, जिससे देश की जीडीपी और कंपनियों की कमाई प्रभावित होने का डर है. इसके अलावा, अमेरिका में 10 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर 4.83 प्रतिशत पर पहुंच गई है, जिससे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा इसी महीने ब्याज दरें बढ़ाने की आशंका तेज हो गई है.
सेक्टर्स का हाल: ऑटो पस्त, सरकारी बैंकों में चमक
कच्चे तेल की मार से ऑटोमोबाइल और पेंट कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखी जा रही है. निफ्टी ऑटो इंडेक्स आज सबसे ज्यादा 0.66% तक फिसल गया. दिग्गज कंपनियों में महिंद्रा एंड महिंद्रा (M&M) 1.3% की गिरावट के साथ टॉप लूजर रहा, जबकि बजाज ऑटो, एशियन पेंट्स, और आयशर मोटर्स के शेयर भी लाल निशान में ट्रेड कर रहे हैं. इसके विपरीत, सरकारी बैंकों में शानदार खरीदारी के चलते यह सेक्टर 1% से ज्यादा मजबूत हुआ. तेल के दाम बढ़ने से निफ्टी ऑयल एंड गैस सेक्टर में भी 0.61% की बढ़त दर्ज की गई.
आगे का अनुमान
तकनीकी जानकारों का कहना है कि निफ्टी के 23,500 के स्तर से नीचे आने के कारण बाजार का ढांचा कमजोर हो गया है. आने वाले दिनों में बाजार के लिए 23,260 से 23,000 का स्तर अगला बड़ा सपोर्ट ज़ोन होगा. निवेशकों को इस भारी उतार-चढ़ाव वाले माहौल में सतर्क रहने और केवल मजबूत फंडामेंटल वाले फार्मा और एफएमसीजी (FMCG) जैसे सुरक्षित सेक्टर्स में ही बने रहने की सलाह दी गई है.
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