अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर वैश्विक कच्चे तेल बाजार पर साफ दिखाई दे रहा है। Brent crude की कीमत एक बार फिर 100 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है। 9 सितंबर को Brent फ्यूचर्स $101.21 प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि अमेरिकी WTI crude $96.05 प्रति बैरल पर रहा। दोनों कीमतें मई के बाद के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई हैं।
अमेरिका-ईरान तनाव से बढ़ी सप्लाई की चिंता
तेल की कीमतों में तेजी की बड़ी वजह मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव और समुद्री मार्गों पर हमलों से पैदा हुई आपूर्ति की चिंता है। अमेरिका द्वारा पांच ईरानी तेल टैंकरों को नष्ट किए जाने के बाद ईरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 10 जहाजों पर हमला करने की बात कही है। इससे बाजार में आगे तेल आपूर्ति बाधित होने की आशंका बढ़ गई है।
होर्मुज पर नजर, लेकिन रास्ता पूरी तरह बंद नहीं
होर्मुज जलडमरूमध्य वैश्विक ऊर्जा कारोबार के लिए बेहद महत्वपूर्ण है। युद्ध से पहले इस मार्ग से दुनिया के करीब 20% तेल और गैस व्यापार का आवागमन होता था। फिलहाल यहां जहाजों की आवाजाही सामान्य स्तर से काफी कम हो गई है। हालांकि, इसे पूरी तरह बंद कहना सही नहीं है—9 सितंबर को भी कुछ जहाज इस मार्ग से गुजरे।
भारत में पेट्रोल-डीजल पर क्या असर?
कच्चे तेल की कीमतों में लंबे समय तक तेजी बनी रहती है तो भारत जैसे बड़े तेल आयातक देश पर दबाव बढ़ सकता है। इससे आयात बिल, परिवहन लागत और महंगाई पर असर पड़ने का जोखिम रहता है। हालांकि, पेट्रोल-डीजल की खुदरा कीमतों में तत्काल कितनी बढ़ोतरी होगी, यह अभी तय नहीं है।
120 डॉलर तक जाने का खतरा?
बाजार विशेषज्ञों की नजर अब इस बात पर है कि अमेरिका-ईरान तनाव कितना लंबा चलता है और होर्मुज से तेल की आपूर्ति कितनी प्रभावित होती है। कुछ विश्लेषकों ने सप्लाई संकट गहराने पर तेल के $120 प्रति बैरल तक पहुंचने की आशंका जताई है, लेकिन यह एक संभावित परिदृश्य है, निश्चित भविष्यवाणी नहीं।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि मध्य पूर्व का तनाव कितने समय तक जारी रहता है। अगर सप्लाई में बाधा लंबे समय तक बनी रही, तो इसका असर वैश्विक महंगाई और ईंधन बाजार पर और ज्यादा दिखाई दे सकता है।
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