Home अंतरराष्ट्रीय पोस्ट ऑफिस में 24 महीने की FD पर कितना मिल रहा है ब्याज, वरिष्ठ नागरिकों के लिए क्या है खास
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पोस्ट ऑफिस में 24 महीने की FD पर कितना मिल रहा है ब्याज, वरिष्ठ नागरिकों के लिए क्या है खास

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देश के आम लोगों के बीच पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाएं काफी पॉपुलर हैं। पोस्ट ऑफिस अपने ग्राहकों को बचत योजनाओं पर न सिर्फ आकर्षक रिटर्न देता है बल्कि इसमें जमा होने वाले एक-एक पैसे की सुरक्षा की गारंटी भी मिलती है। यही वजह है कि आज भी देश का एक बड़ा वर्ग बढ़-चढ़कर पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं में बेफिक्र होकर अपने खून-पसीने की कमाई को जमा कर देता है। यहां हम जानेंगे कि पोस्ट ऑफिस में 24 महीने की एफडी पर कितना ब्याज मिल रहा है?

24 महीने की एफडी खातों पर कितना ब्याज दे रहा है पोस्ट ऑफिस

देश के तमाम बैंकों की तरह, पोस्ट ऑफिस में भी एफडी खाते खोले जाते हैं। हालांकि, पोस्ट ऑफिस में एफडी को टीडी यानी टाइम डिपोजिट के नाम से जाना जाता है। टाइम डिपोजिट स्कीम, बिल्कुल बैंकों की एफडी स्कीम की तरह ही होती है। इसमें आपको सिर्फ एक बार पैसा जमा करना होता है और फिर मैच्यॉरिटी पर आपको फिक्स ब्याज के साथ पूरा पैसा वापस मिल जाता है। पोस्ट ऑफिस में 1 साल, 2 साल, 3 साल और 5 साल के लिए एफडी खाते खोले जाते हैं।

पोस्ट ऑफिस की स्कीम में वरिष्ठ नागरिकों को कितना मिलेगा रिटर्न

पोस्ट ऑफिस अपने ग्राहकों को 24 महीने यानी 2 साल की एफडी स्कीम पर 7.00 प्रतिशत का ब्याज दे रहा है। पोस्ट ऑफिस सभी आयु वर्ग के ग्राहकों को बराबर ब्याज देता है। हालांकि, बैंकों में 60 साल या इससे ज्यादा आयु के ग्राहकों को सामान्य ग्राहकों की तुलना में ज्यादा मिलता है। इतना ही नहीं, कई बैंक 80 साल या इससे ज्यादा उम्र के ग्राहकों को वरिष्ठ नागरिकों की तुलना में और भी ज्यादा रिटर्न देते हैं। लेकिन, पोस्ट ऑफिस में वरिष्ठ नागरिकों को कोई विशेष सुविधा नहीं मिलती है। पोस्ट ऑफिस, एफडी खातों पर वरिष्ठ नागरिकों को भी उतना ही ब्याज देता है, जितना सामान्य ग्राहकों को दिया जाता है।

पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं पर नहीं पड़ता रेपो रेट का खास असर

पोस्ट ऑफिस की एफडी स्कीम की ब्याज दरों पर भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो रेट का कोई खास असर नहीं पड़ता है। पोस्ट ऑफिस की बचत योजनाओं पर मिलने वाला ब्याज, भारत सरकार का वित्त मंत्रालय तय करता है। वित्त मंत्रालय हर 3 महीनों पर ब्याज दरों की समीक्षा करता है और जरूरत के आधार पर इसमें बदलाव करता है। जबकि, बैंकों द्वारा एफडी खातों पर दिया जाने वाला ब्याज, भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो रेट के आधार पर तय होता है।

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Shubhanshu Mishra - Founder and Editor in Chief of The Digital Khabari

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