भारत में मौसमी H1N1 इन्फ्लूएंजा के मामलों के बीच विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की H5N1 एवियन इन्फ्लूएंजा को लेकर चेतावनी ने चिंता बढ़ा दी है। हालांकि फिलहाल इंसान से इंसान में H5N1 के लगातार फैलने का कोई सबूत नहीं है और आम लोगों के लिए जोखिम कम माना जा रहा है, लेकिन विशेषज्ञों ने निगरानी, टेस्टिंग और तैयारियों को मजबूत रखने पर जोर दिया है।

एशिया-प्रशांत क्षेत्र में H5N1 के लगातार फैलाव और इसके जानवरों से इंसानों तक पहुंचने की आशंका को देखते हुए WHO ने देशों से अपनी तैयारियां मजबूत करने की अपील की है। हाल ही में राष्ट्रीय इन्फ्लूएंजा केंद्र और इन्फ्लूएंजा सर्विलांस की 19वीं क्षेत्रीय बैठक आयोजित हुई, जिसमें 150 से अधिक इन्फ्लूएंजा विशेषज्ञों, लैब वैज्ञानिकों और सार्वजनिक स्वास्थ्य अधिकारियों ने हिस्सा लिया।

बैठक में इस बात पर चर्चा हुई कि पक्षियों में फैल रहे H5N1 समेत इन्फ्लूएंजा वायरस की निगरानी से मिलने वाले डेटा को तेजी से सार्वजनिक स्वास्थ्य फैसलों में कैसे बदला जाए।

भारत के लिए क्यों अहम है WHO का अलर्ट?

भारत में पोल्ट्री और दूसरे पक्षियों में एवियन इन्फ्लूएंजा के मामले पहले भी सामने आते रहे हैं। हाल के वर्षों में देश के अलग-अलग हिस्सों में बर्ड फ्लू के प्रकोप की रिपोर्ट हुई है।

विशेषज्ञों के मुताबिक भारत में पोल्ट्री फार्म, घरों में पाले जाने वाले पक्षी, जीवित पक्षियों के बाजार और इंसानों-पशुओं के बीच लगातार संपर्क जैसी परिस्थितियां H5N1 की निगरानी को महत्वपूर्ण बनाती हैं।

हालांकि 2026 में अब तक भारत में इंसानों में H5N1 संक्रमण का कोई मामला रिपोर्ट नहीं हुआ है। WHO के अनुसार, भारत में पिछले कुछ वर्षों में मानव H5N1 संक्रमण के बेहद कम मामले सामने आए हैं, लेकिन संक्रमण गंभीर होने की संभावना के कारण सतर्कता जरूरी है।

H5N1 क्या है?

H5N1 को आमतौर पर एवियन इन्फ्लूएंजा या बर्ड फ्लू कहा जाता है। यह इन्फ्लूएंजा वायरस का एक प्रकार है, जो मुख्य रूप से पक्षियों को संक्रमित करता है और कुछ परिस्थितियों में अन्य जानवरों और इंसानों को भी संक्रमित कर सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार इंसानों में संक्रमण आमतौर पर संक्रमित या बीमार पक्षियों और जानवरों के सीधे संपर्क से जुड़ा होता है। हालांकि H5N1 इंसानों के बीच आसानी से फैलने वाला वायरस नहीं माना जाता है और लगातार मानव-से-मानव संक्रमण का कोई प्रमाण नहीं है।

H1N1 और H5N1 में क्या अंतर है?

विशेषज्ञों का कहना है कि H1N1 और H5N1 को एक ही खतरा समझना सही नहीं होगा।

H1N1 एक मौसमी मानव इन्फ्लूएंजा वायरस है, जो इंसानों के बीच आसानी से फैल सकता है। वहीं H5N1 मुख्य रूप से एवियन इन्फ्लूएंजा वायरस है, जिसका इंसानों में संक्रमण आमतौर पर संक्रमित पक्षियों या जानवरों के संपर्क से जुड़ा होता है।

हालांकि दोनों संक्रमणों के शुरुआती लक्षण कुछ हद तक मिलते-जुलते हो सकते हैं। इसलिए सही पहचान के लिए टेस्टिंग और निगरानी महत्वपूर्ण है।

H5N1 के लक्षण क्या हो सकते हैं?

विशेषज्ञों के अनुसार इंसानों में H5N1 संक्रमण होने पर बुखार, खांसी और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षण दिखाई दे सकते हैं। कुछ मामलों में पाचन तंत्र से जुड़े लक्षण भी सामने आ सकते हैं।

अगर किसी व्यक्ति का बीमार या मृत पक्षियों से संपर्क हुआ हो और उसके बाद इन्फ्लूएंजा जैसे लक्षण दिखाई दें, तो उसे तुरंत चिकित्सकीय सलाह लेनी चाहिए और डॉक्टर को पक्षियों या संक्रमित जानवरों के संपर्क की जानकारी देनी चाहिए।

H5N1 से बचने के लिए क्या करें?

  • बीमार या मृत पक्षियों और जानवरों के अनावश्यक संपर्क से बचें।
  • मृत या बीमार पक्षियों को खुद से न छुएं और न ही उनका सेवन करें।
  • पोल्ट्री के साथ काम करने वाले लोगों को जरूरत पड़ने पर उचित PPE का इस्तेमाल करना चाहिए।
  • पक्षियों या जानवरों के संपर्क के बाद हाथ अच्छी तरह साफ करें।
  • बिना हाथ धोए आंख, नाक या मुंह को छूने से बचें।
  • पोल्ट्री, मांस और अंडों को अच्छी तरह पकाकर ही खाएं।
  • कच्चे या अधपके पोल्ट्री उत्पादों से बचें।
  • पक्षियों की असामान्य मौत दिखाई देने पर संबंधित पशु चिकित्सा या स्वास्थ्य अधिकारियों को सूचना दें।

विशेषज्ञों ने घबराने के बजाय निगरानी पर दिया जोर

स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल H5N1 को लेकर आम लोगों में घबराने की जरूरत नहीं है। इंसान से इंसान में इसके लगातार फैलने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया है।

हालांकि H5N1 संक्रमण गंभीर हो सकता है, इसलिए भारत के लिए मजबूत लैब नेटवर्क, शुरुआती चेतावनी प्रणाली और इंसान-पशु-पर्यावरण की संयुक्त निगरानी बेहद जरूरी है।

WHO भी One Health दृष्टिकोण पर जोर दे रहा है, जिसमें मानव स्वास्थ्य के साथ पशु और पर्यावरणीय स्वास्थ्य की निगरानी को एक साथ जोड़ा जाता है। इसका उद्देश्य किसी संभावित जूनोटिक बीमारी का शुरुआती स्तर पर पता लगाकर उसके बड़े प्रकोप में बदलने से पहले कार्रवाई करना है।

यानी फिलहाल H5N1 को लेकर स्थिति घबराने वाली नहीं, लेकिन सतर्क रहने वाली जरूर है। भारत में मौसमी H1N1 और पक्षियों में एवियन इन्फ्लूएंजा की निगरानी साथ-साथ मजबूत रखना भविष्य के किसी बड़े खतरे से बचाव में अहम भूमिका निभा सकता है।