दुर्ग: गणेशोत्सव को लेकर छत्तीसगढ़ में तैयारियां तेज हो गई हैं। दुर्ग जिले का थनौद गांव, जो मूर्तिकारों के गांव के रूप में प्रसिद्ध है, इन दिनों गणेश प्रतिमाओं के निर्माण से गुलजार है। यहां तीन पीढ़ियों से चली आ रही कला के जरिए आकर्षक और अनोखी प्रतिमाओं को अंतिम रूप दिया जा रहा है।

18 से 20 फीट तक की प्रतिमाएं

थनौद में गणेश प्रतिमाओं का निर्माण करीब छह महीने पहले शुरू हो जाता है। पहले ढांचा तैयार किया जाता है, इसके बाद मूर्ति को आकार, मुद्रा और डिजाइन दिया जाता है। यहां 5 इंच से लेकर करीब 20 फीट तक की प्रतिमाएं बनाई जाती हैं।

इस बार अनोखे रूप की डिमांड

मूर्तिकार केवल चक्रधारी इस बार हनुमान, घोड़े और पक्षी पर विराजमान गणेश जी की आकर्षक प्रतिमाएं तैयार कर रहे हैं। करीब 5 फीट की प्रतिमा की कीमत 50 हजार रुपये से शुरू होकर डिजाइन और आकार के अनुसार करीब 4.30 लाख रुपये तक पहुंच रही है। इस बार करीब 25 चुनिंदा प्रतिमाएं तैयार की जा रही हैं।

दूसरे राज्यों से भी मिल रहे ऑर्डर

थनौद की गणेश प्रतिमाओं की मांग छत्तीसगढ़ के अलावा ओडिशा, हैदराबाद और महाराष्ट्र तक है। मूर्तियों के निर्माण में शिवनाथ नदी की मिट्टी का उपयोग किया जाता है।

थनौद में मूर्ति निर्माण महज कारोबार नहीं, बल्कि तीन पीढ़ियों से चली आ रही कला, मेहनत और परंपरा का हिस्सा है।