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छत्तीसगढ़ में EV बना गेम चेंजर, परंपरागत वाहनों का बड़ा विकल्प, लेकिन सब्सिडी की चमक फीकी

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छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। दोपहिया से लेकर कारों और सार्वजनिक परिवहन तक EV को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने नीति और सब्सिडी की व्यवस्था की है। आंकड़े बताते हैं कि राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग लगातार बढ़ी है, लेकिन दूसरी तरफ हजारों वाहन मालिकों की सब्सिडी अब भी लंबित है। यानी EV की रफ्तार तेज है, लेकिन प्रोत्साहन राशि का भुगतान उतनी तेजी से नहीं हो पा रहा।

ईवी की बढ़ती रफ्तार, आंकड़े दे रहे गवाही

छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक तीन प्रमुख श्रेणियों को मिलाकर वर्ष 2021 में राज्य में 9,811 इलेक्ट्रिक वाहन थे।

इसके बाद संख्या लगातार बढ़ती गई—

  • 2022: 29,347
  • 2023: 66,463
  • 2024: 1,14,966
  • 2025: 1,62,572
  • 2026: 1,92,959

यानी 2021 से 2026 के बीच इलेक्ट्रिक वाहनों की संख्या करीब 20 गुना तक बढ़ गई।

30 अगस्त 2022 से लागू हुई EV नीति

छत्तीसगढ़ राज्य इलेक्ट्रिक वाहन नीति-2022 को 30 अगस्त 2022 से लागू किया गया था। इसका उद्देश्य राज्य में इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना, प्रदूषण कम करना और वाहन खरीदारों को आर्थिक प्रोत्साहन देना था।

नीति में दोपहिया, तिपहिया, चारपहिया और सार्वजनिक परिवहन में इलेक्ट्रिक वाहनों की हिस्सेदारी बढ़ाने पर जोर दिया गया।

सरकार ने 2027 तक नए वाहन पंजीकरण में EV की हिस्सेदारी 15 प्रतिशत करने का लक्ष्य रखा था।

2024 में 44 हजार से ज्यादा EV रजिस्टर

यातायात विभाग के मासिक पंजीकरण आंकड़ों के मुताबिक वर्ष 2024 में इलेक्ट्रिक मोटर कार और इलेक्ट्रिक एम-साइकिल/स्कूटर को मिलाकर कुल 44,710 वाहन पंजीकृत हुए।

इनमें—

  • इलेक्ट्रिक मोटर कार: 11,829
  • इलेक्ट्रिक दोपहिया: 32,881

अक्टूबर 2024 EV पंजीकरण के लिहाज से सबसे खास महीना रहा। इस महीने 2,242 इलेक्ट्रिक कार और 5,115 इलेक्ट्रिक दोपहिया पंजीकृत हुए। यानी सिर्फ अक्टूबर में इन दोनों श्रेणियों में कुल 7,357 वाहन रजिस्टर हुए।

2025 में कारों की रफ्तार घटी, दोपहिया आगे निकले

वर्ष 2025 में इलेक्ट्रिक कारों के पंजीकरण में बड़ी गिरावट दिखाई दी। पूरे साल सिर्फ 2,150 इलेक्ट्रिक कार पंजीकृत हुईं, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 11,829 था।

इसके उलट इलेक्ट्रिक दोपहिया की मांग बढ़ी। 2025 में कुल 38,625 इलेक्ट्रिक एम-साइकिल/स्कूटर पंजीकृत हुए।

दिसंबर 2025 दोपहिया के लिए सबसे बड़ा महीना रहा, जब 6,695 इलेक्ट्रिक दोपहिया रजिस्टर हुए। अगस्त में भी 5,327 वाहनों का पंजीकरण हुआ।

दोनों श्रेणियों को मिलाकर 2025 में कुल 40,775 इलेक्ट्रिक वाहन पंजीकृत हुए।

“प्रदेश में इलेक्ट्रिक वाहनों का क्रेज तेजी से बढ़ रहा है। पिछले कुछ समय में EV वाहनों के रजिस्ट्रेशन में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। सस्ता ईंधन, आसान संचालन और प्रदूषण रहित सफर के चलते लोग अब टू-व्हीलर और फोर-व्हीलर इलेक्ट्रिक वाहनों को ज्यादा पसंद कर रहे हैं।”
— डी. रविशंकर, अपर परिवहन आयुक्त, छत्तीसगढ़

2026: आठ महीने में 30 हजार से ज्यादा EV

जनवरी से अगस्त 2026 तक इलेक्ट्रिक मोटर कार और इलेक्ट्रिक एम-साइकिल/स्कूटर को मिलाकर 30,035 वाहनों का पंजीकरण हो चुका है।

इनमें—

  • इलेक्ट्रिक कार: 2,158
  • इलेक्ट्रिक दोपहिया: 27,877

यानी 2026 के सिर्फ आठ महीनों में ही इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की संख्या काफी तेजी से बढ़ी है।

2026 में दोपहिया वाहनों का मासिक पंजीकरण

  • जनवरी: 2,844
  • फरवरी: 2,604
  • मार्च: 4,176
  • अप्रैल: 2,593
  • मई: 3,603
  • जून: 3,934
  • जुलाई: 4,218
  • अगस्त: 3,905

मार्च और जुलाई में इलेक्ट्रिक दोपहिया का आंकड़ा 4 हजार के पार रहा।

जून में सबसे ज्यादा इलेक्ट्रिक कारें

2026 में जनवरी से अगस्त के बीच इलेक्ट्रिक कारों का पंजीकरण इस तरह रहा—

  • जनवरी: 178
  • फरवरी: 145
  • मार्च: 211
  • अप्रैल: 103
  • मई: 257
  • जून: 497
  • जुलाई: 332
  • अगस्त: 435

इनमें जून 2026 सबसे मजबूत महीना रहा, जब 497 इलेक्ट्रिक कारें पंजीकृत हुईं।

तीन साल में 1.15 लाख से ज्यादा EV

जनवरी 2024 से अगस्त 2026 तक सिर्फ इलेक्ट्रिक कार और इलेक्ट्रिक दोपहिया श्रेणी में कुल 1,15,520 वाहनों का पंजीकरण हुआ।

इसमें—

  • 2024: 44,710
  • 2025: 40,775
  • 2026 (अगस्त तक): 30,035

कुल 1,15,520 वाहनों में 99,383 इलेक्ट्रिक दोपहिया और 16,137 इलेक्ट्रिक कारें शामिल हैं।

इससे साफ है कि छत्तीसगढ़ में EV विस्तार की सबसे बड़ी ताकत इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहन हैं।

अब सबसे बड़ा सवाल—सब्सिडी कहां अटकी?

EV की बढ़ती मांग के बीच सब्सिडी के आंकड़े दूसरी तस्वीर दिखाते हैं।

विधानसभा में दिए गए जवाब के मुताबिक 15 जून 2026 तक 1,22,862 इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए 270 करोड़ 45 लाख रुपये की सब्सिडी स्वीकृत की गई थी।

लेकिन इनमें से सिर्फ 53,308 वाहनों को 115 करोड़ 77 लाख रुपये का भुगतान हुआ।

यानी—

  • सब्सिडी स्वीकृत: 270.45 करोड़ रुपये
  • भुगतान: 115.77 करोड़ रुपये
  • लंबित राशि: 154.68 करोड़ रुपये
  • भुगतान बाकी वाहन: 69,554

इस हिसाब से स्वीकृत सब्सिडी राशि का करीब 43 प्रतिशत ही भुगतान हो पाया था, जबकि करीब 57 प्रतिशत राशि लंबित थी।

69,554 वाहन अब भी भुगतान की कतार में

स्वीकृत 1,22,862 वाहनों में से 53,308 वाहनों को भुगतान किया गया। इसका मतलब है कि 69,554 वाहन ऐसे थे, जिनकी स्वीकृत सब्सिडी का भुगतान 15 जून 2026 तक बाकी था।

रुपये में देखें तो 154 करोड़ 68 लाख रुपये की राशि लंबित थी।

यही वह आंकड़ा है, जो EV नीति के सामने सबसे बड़ा सवाल खड़ा करता है—सब्सिडी मंजूर होने के बाद पैसा लाभार्थी तक कब पहुंच रहा है?

कितनी है EV सब्सिडी?

विधानसभा में पेश जानकारी के अनुसार नीति के तहत 20 लाख रुपये तक कीमत वाले इलेक्ट्रिक वाहन पर वाहन की कीमत का 10 प्रतिशत या अधिकतम 1 लाख रुपये तक प्रोत्साहन राशि देने का प्रावधान है।

पहले अधिकतम प्रोत्साहन राशि 1.50 लाख रुपये तक थी, जिसे संशोधन के बाद घटाकर 1 लाख रुपये किया गया।

2026-27 में 100 करोड़ रुपये का बजट

सरकार ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में EV सब्सिडी भुगतान के लिए 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया है और भुगतान की प्रक्रिया जारी होने की बात कही है।

हालांकि, 15 जून 2026 तक ही करीब 154.68 करोड़ रुपये की स्वीकृत सब्सिडी लंबित थी। ऐसे में लंबित भुगतान के साथ नए दावों को संभालना सरकार के लिए बड़ी चुनौती हो सकती है।

240 ई-बसों को मंजूरी, लेकिन सड़क पर आने का इंतजार

सिर्फ निजी वाहनों में ही नहीं, सार्वजनिक परिवहन को भी इलेक्ट्रिक बनाने की तैयारी है।

प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के तहत छत्तीसगढ़ के चार शहरों के लिए 240 ई-बसों को मंजूरी मिली है।

शहरवार आंकड़ा—

  • रायपुर: 100 ई-बस
  • दुर्ग-भिलाई: 50 ई-बस
  • बिलासपुर: 50 ई-बस
  • कोरबा: 40 ई-बस

हालांकि मंजूरी मिलने के बावजूद इन बसों का नियमित संचालन शुरू होना बाकी है।

इसके लिए बस डिपो, बैटरी पावर इंफ्रास्ट्रक्चर, केंद्र से बसों की प्राप्ति और चयनित ऑपरेटर के जरिए संचालन जैसी प्रक्रियाएं पूरी करनी होंगी।

यानी कागज पर 240 ई-बसों को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन यात्रियों को इनका फायदा तभी मिलेगा जब ये सड़क पर उतरेंगी।

पूरी तस्वीर क्या कहती है?

छत्तीसगढ़ में EV की कहानी के दो पहलू हैं।

पहला पहलू बेहद मजबूत है— इलेक्ट्रिक वाहनों की मांग तेजी से बढ़ रही है। 2024 से अगस्त 2026 के बीच सिर्फ कार और दोपहिया श्रेणी में 1.15 लाख से ज्यादा वाहन पंजीकृत हुए। इनमें करीब 99 हजार दोपहिया हैं।

दूसरा पहलू चुनौती वाला है— 1.22 लाख से ज्यादा वाहनों के लिए 270 करोड़ रुपये से अधिक की सब्सिडी स्वीकृत होने के बावजूद 15 जून 2026 तक सिर्फ 115.77 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ था।

सार्वजनिक परिवहन में भी 240 ई-बसों को मंजूरी मिल चुकी है, लेकिन उनके संचालन के लिए इंफ्रास्ट्रक्चर और दूसरी प्रक्रियाएं अभी पूरी होनी हैं।

असली गेम चेंजर क्या होगा?

EV को बढ़ावा देने के लिए सिर्फ वाहन खरीद बढ़ना पर्याप्त नहीं है। समय पर सब्सिडी भुगतान, चार्जिंग इंफ्रास्ट्रक्चर, ई-बसों का संचालन और मजबूत सपोर्ट सिस्टम भी उतना ही जरूरी है।

छत्तीसगढ़ में इलेक्ट्रिक वाहनों की रफ्तार बता रही है कि लोगों ने इस विकल्प को स्वीकार करना शुरू कर दिया है। अब सरकार के सामने चुनौती यह है कि EV की बढ़ती मांग के साथ सब्सिडी और इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था भी उतनी ही तेजी से आगे बढ़े।

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Shubhanshu Mishra - Founder and Editor in Chief of The Digital Khabari

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