हैदराबाद अच्छी पढ़ाई और अंतरराष्ट्रीय शैक्षिक मानकों के लिए एक हब के तौर पर उभर रहा है. हाल ही में, हैदराबाद आने वाले विदेशी स्टूडेंट्स की संख्या में तेजी से बढ़ोतरी हुई है.
शहर में अंडरग्रेजुएट, पोस्टग्रेजुएट और इंजीनियरिंग कोर्स करने के लिए एशियाई और अफ्रीकी देशों से आने वाले स्टूडेंट्स की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है. अमेरिका, यूरोप, एशिया और अफ्रीका के 80 देशों के छात्र अभी उस्मानिया यूनिवर्सिटी, मौलाना आजाद नेशनल उर्दू यूनिवर्सिटी, हैदराबाद यूनिवर्सिटी और जेएनटीयू जैसे इंस्टीट्यूशन में पढ़ रहे हैं.
माना जा रहा है कि स्टूडेंट्स हैदराबाद को कम से कम खर्च में उपयोगी परिणाम की वजह से चुन रहे हैं, क्योंकि उनके अपने देशों में हायर एजुकेशन में काफी अधिक खर्च होता है.
अफ्रीकी देशों से ज़्यादा लोग आ रहे
दूसरे इलाकों के मुकाबले, अफ्रीकी देशों से बड़ी संख्या में स्टूडेंट हायर एजुकेशन के लिए उस्मानिया यूनिवर्सिटी आ रहे हैं. सबसे ज्यादा विदेशी स्टूडेंट की मेजबानी करने वाली यूनिवर्सिटी में उस्मानिया देश में दूसरे नंबर पर है.
दक्षिण अफ्रीका, नाइजीरिया, जाम्बिया और अंगोला के स्टूडेंट्स उस्मानिया यूनिवर्सिटी (OU) कैंपस के साथ-साथ सैफाबाद पीजी कॉलेज में कोर्स में एडमिशन ले रहे हैं.
इस बीच, यूरोप और अमेरिका के छात्र विदेशी यूनिवर्सिटी के साथ आपसी समझौते के तहत डिग्री और इंजीनियरिंग कोर्स कर रहे हैं. उस्मानिया यूनिवर्सिटीज के प्रो. कुमार मोलुगरम ने कहा, “जेएनटीयू के अधिकारी अमेरिका और जर्मनी की बड़ी यूनिवर्सिटीज से भी बातचीत कर रहे हैं. इससे नौकरी और रोजगार के मौके बढ़ेंगे.”
उस्मानिया यूनिवर्सिटी जैसे इंस्टीट्यूशन में पढ़ाई करने वाले विदेशी स्टूडेंट्स को अपना कोर्स पूरा करने के बाद अपने ही देशों में नौकरी और रोजगार के मौके मिलेंगे.
पोस्टग्रेजुएट डिग्री के बाद पीएचडी पूरी करने से रिसर्च के फील्ड में बेहतर करने और अंतरराष्ट्रीय अनुसंधान संगठन में पद पाने के रास्ते खुलते हैं.
मोलुगरम ने कहा, “हमने केंद्र और राज्य सरकारों से विदेशी स्टूडेंट्स को फेलोशिप देने की अपील करने का फैसला किया है, जिससे उनमें से ज़्यादा से ज़्यादा लोग हैदराबाद आने के लिए प्रोत्साहित होंगे.”
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