सरकारी कड़े कदमों के बाद थोक बाजार में चीनी की कीमतों में 30 फीसदी तक की भारी गिरावट आई है. सोमवार, 31 अगस्त 2026 को एक्स-मिल चीनी की कीमतें 18 अगस्त के ₹67 प्रति किलो के उच्चतम स्तर से गिरकर ₹47 प्रति किलो पर आ गईं. हालांकि, थोक बाजार में आई इस बड़ी गिरावट का फायदा आम उपभोक्ताओं को तुरंत नहीं मिल पा रहा है, क्योंकि रिटेल बाजारों में कीमतें अभी भी पुरानी दरों पर टिकी हुई हैं.

रविवार को देश के रिटेल बाजार में चीनी औसतन ₹64.23 प्रति किलो की दर से बिक रही थी, जबकि थोक दर ₹59.72 प्रति किलो थी.

खुदरा कीमतों में देरी की वजह
उद्योग जगत से जुड़े विशेषज्ञों के अनुसार, मिलों में कीमतें घटने के बावजूद दुकानों पर चीनी महंगी मिलने के पीछे पुराना स्टॉक और नुकसान का डर है

महंगा पुराना स्टॉक: जिन छोटे दुकानदारों और रिटेलरों ने पहले ही महंगी थोक दरों पर चीनी खरीद ली थी, वे इसे घाटे में बेचने को तैयार नहीं हैं.

10 दिनों का समय: एक आम खुदरा दुकानदार के पास आमतौर पर 50-50 किलो के 10 से 15 चीनी के बोरे स्टॉक में होते हैं. जब तक यह पुराना स्टॉक पूरी तरह खत्म नहीं हो जाता और कम कीमत वाला नया स्टॉक बाजार में नहीं आता, तब तक खुदरा कीमतों में कमी देखने को नहीं मिलेगी. विशेषज्ञों का मानना है कि रिटेल कीमतों में बदलाव दिखने में कम से कम 10 दिन का समय लगेगा.

आमतौर पर बाजार में मिल की कीमत और थोक मूल्य के बीच ₹2 से ₹3 प्रति किलो, और मिल की कीमत से रिटेल मूल्य के बीच ₹7 से ₹8 प्रति किलो का अंतर सामान्य माना जाता है. इस लिहाज से आने वाले दिनों में खुदरा बाजार में चीनी ₹54 से ₹55 प्रति किलो तक आ सकती है.

सरकार के सख्त कदम और नियम
केंद्र सरकार ने चीनी मिलों पर कृत्रिम रूप से दाम बढ़ाने (जमाखोरी) का आरोप लगाया था. सरकार का स्पष्ट कहना है कि देश में चीनी की कोई कमी नहीं है. कीमतों को काबू में करने के लिए सरकार ने कई बड़े फैसले लिए हैं:

एक्सपोर्ट चीनी की घरेलू बाजार में बिक्री: सरकार ने उन मिलों को अपनी रिफाइंड चीनी घरेलू बाजार में बेचने की इजाजत दे दी है, जिसे पहले निर्यात (export) किया जाना था. अगले दो महीनों में लगभग 3 से 3.5 लाख टन अतिरिक्त चीनी भारतीय बाजारों में आएगी.

बल्क उपभोक्ताओं पर पाबंदी: 1 सितंबर से हर महीने 10 टन से अधिक चीनी का इस्तेमाल करने वाले बड़े खरीदारों (जैसे मिठाई और कोल्ड ड्रिंक निर्माता) पर सख्त नियम लागू होंगे. अब ये कंपनियां 15 दिनों से अधिक का स्टॉक जमा नहीं रख सकेंगी.

इस साल चीनी का उत्पादन अनुमान 343 लाख टन से घटाकर 306 लाख टन किया गया है, लेकिन इसके बावजूद यह भारत की 280-285 लाख टन की वार्षिक घरेलू मांग को पूरा करने के लिए पर्याप्त से अधिक है.