जापान की प्रमुख क्रेडिट रेटिंग एजेंसी JCR (जापान क्रेडिट रेटिंग एजेंसी) ने भारतीय अर्थव्यवस्था को एक बड़ी वैश्विक कामयाबी देते हुए भारत की सॉवरेन क्रेडिट रेटिंग को अपग्रेड कर दिया है. JCR ने भारत की रेटिंग को ‘BBB+’ से बढ़ाकर ‘A-‘ (ए माइनस) कर दिया है, और इसके साथ ही देश का आउटलुक ‘स्थिर’ रखा है. यह अपग्रेड दर्शाता है कि भारत अब वित्तीय दायित्वों को पूरा करने में बेहद मजबूत और सुरक्षित देशों की श्रेणी में आ गया है.

एजेंसी ने इस ऐतिहासिक फैसले के पीछे भारत की मजबूत आर्थिक वृद्धि, बैंकिंग क्षेत्र में बड़े सुधार और सरकार की बेहतर वित्तीय नीतियों को मुख्य वजह बताया है.

  • मजबूत और निरंतर आर्थिक विकास: 140 करोड़ से अधिक आबादी और 3.9 ट्रिलियन डॉलर की जीडीपी के साथ भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार करीब 7% की दर से बढ़ रही है. निजी खपत और सरकारी बुनियादी ढांचा निवेश के दम पर चालू वित्त वर्ष (FY27) में भी भारत की विकास दर 6% से अधिक रहने का अनुमान है.
  • वित्तीय प्रणाली में सुधार: भारत के बैंकिंग और गैर-बैंकिंग (NBFC) सेक्टर्स पहले से काफी सुरक्षित हुए हैं. रिजर्व बैंक की सख्त निगरानी और दिवाला कानून (IBC) के कारण बैंकों के फंसे हुए कर्ज (NPA) में भारी कमी आई है, जिससे देश का फाइनेंशियल सिस्टम बेहद मजबूत हुआ है.
  • डिजिटल क्रांति और बुनियादी सुधार: JCR ने माना कि भारत सरकार ने डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) और जीएसटी (GST) जैसी नीतियों को जमीन पर बहुत मजबूती से उतारा है. इनसे देश में उत्पादकता बढ़ी है और अर्थव्यवस्था का तेजी से औद्योगिकीकरण हुआ है.

राजकोषीय घाटा और बाहरी मोर्चे पर राहत
हालांकि JCR ने माना कि भारत के सामने राज्यों के बीच असमानता और चुनावी चक्रों के कारण राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने जैसी कुछ चुनौतियां हैं. लेकिन, केंद्र सरकार द्वारा सब्सिडी जैसे गैर-जरूरी खर्चों को रोककर कैपेक्स बढ़ाने की नीति की तारीफ की गई है.

सरकार का लक्ष्य वित्त वर्ष 2027 में अपने कर्ज-टू-जीडीपी अनुपात को घटाकर 55.6% करने का है, जिसे मार्च 2031 तक 50% पर लाने का बड़ा लक्ष्य रखा गया है. इसके अलावा, भारत का चालू खाता घाटा (CAD) नियंत्रण में है और विदेशी मुद्रा भंडार 729.33 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर है, जो देश को किसी भी बाहरी आर्थिक झटके से बचाने के लिए एक मजबूत कवच का काम करता है.

इस फैसले के मायने
JCR की ‘A’ श्रेणी की रेटिंग का मतलब है कि भारत पर डिफ़ॉल्ट का जोखिम बहुत कम है. इस अपग्रेड से वैश्विक मंच पर भारत की साख बढ़ेगी. अब भारतीय कंपनियों और सरकार के लिए विदेशी बाजारों से सस्ते ब्याज दरों पर कर्ज लेना आसान हो जाएगा. साथ ही, जापान के बड़े और रूढ़िवादी पेंशन फंड्स, जो सिर्फ ‘A’ श्रेणी वाले देशों में निवेश करते हैं, उनके लिए अब भारत में अरबों डॉलर के निवेश का रास्ता साफ हो गया है.